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Mahashivratri: The importance of worship and consecration

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आगरालीक्स… महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च गुरुवार को मनाया जाएगा। देवों के देव महादेव शीघ्र प्रसन्न होकर उपासक की मनोकामना पूर्ण करते हैं। परमपिता परमेश्वर की शिव की पूजा-अर्चना कैसे की जाए। इसकी जानकारी आगरालीक्स में दे रहे हैं ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा।

महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता है। यह पर्व यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस व्रत को स्त्री, पुरुष, युवा, वृद्ध सभी कर सकते हैं।
11 मार्च के दिन विधिपूर्वक व्रत रखने, शिवपूजन, रुद्राभिषेक, शिवरात्रि कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व “ॐ नम: शिवाय” का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं। व्रत के दूसरे दिन यथाशक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन आदि दान करना चाहिए।
चार प्रहर पूजन अभिषेक विधान
प्रथम प्रहर- शाम 6.48 से रात्रि 9.58 तक।
दूसरा प्रहर- रात्रि 9.58 से रात्रि 1.08 तक।
तृतीय प्रहर- रात्रि 1.18 से भोर 4.18 तक।
चतुर्थ प्रहर- भोर 4.18 से प्रातः 7.28 तक।

(पहर की गणना अपने स्थानीय सूर्योदय से करना विधि सम्मत है।)
शिवरात्रि व्रत की महिमा-मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है, इस व्रत को लगातार 14 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्धापन कर देना चाहिए
महाशिवरात्रि व्रत की विधि
महाशिवरात्री व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन, भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए
महाशिवरात्रि व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है। प्रत्येक पहर की पूजा में “उँ नम: शिवाय” व ” शिवाय नम:” का जाप करते रहना चाहिए। अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता हैं। चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपावस की अवधि में 4 पहर का रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है
शिव पूजन के लिए कुछ खास बातें
-स्नान कर के ही पूजा में बेठे
-साफ सुथरा वस्त्र धारण कर ( हो सके तो सिलाई बिना का तो बहुत अच्छा )
-आसन एक दम स्वच्छ चाहिए ( दर्भासन हो तो उत्तम )
-पूर्व या उत्तर दिशा में मुख कर के ही पूजा करें।
-बिल्व पत्र पर चिकना वाला हिस्सा होता है, वही शिवलिंग पर चढ़ाये ( खंडित बिल्वपत्र न चढ़ाएं)
-संपूर्ण परिक्रमा कभी भी नहीं करें ( जहां से जल पसार रहा हैं, वहां से वापस आ जाएं )
-पूजन में चंपा के पुष्प का प्रयोग नहीं करें।
-बिल्व पत्र के उपरांत आक के फूल, धतूरा पुष्प या नील कमल का प्रयोग अवश्य कर सकते हैं। -शिव प्रसाद का कभी भी इनकार मत करे ( ये सब के लिए पवित्र हे )
पूजन सामग्री
शिव की मूर्ति या शिवलिंगम, अबीर- गुलाल, चन्दन ( सफ़ेद ) अगरबत्ती धूप ( गुग्गुल ) बिलिपत्र बिल्व फल, तुलसी, दूर्वा, चावल, पुष्प, फल,मिठाई, पान-सुपारी, जनेऊ, पंचामृत, आसन, कलश, दीपक, शंख, घंट, आरती का होना आवश्यक है।
पूजन का विधि-विधान
-महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्त का सैलाब शिव मंदिरों में विशेष रुप से देखने को मिलता है। भगवान भोले नाथ अत्यधिक प्रसन्न होते है, जब उनका पूजन बेल- पत्र आदि चढाते हुए अभिषेक किया किया जाता है। व्रत करने और पूजन के साथ जब रात्रि जागरण भी किया जाये, तो यह व्रत और अधिक शुभ फल देता है। इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी, इसलिये रात्रि में शिव की बारात निकाली जाती है।
-महाशिव रात्रि के दिन शिवजी का अभिषेक करने के लिये सबसे पहले मिट्टी काबर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, उसमें बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते हैं। व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।
-जो इंसान भगवन शंकर का पूजन करना चाहता है, उसे प्रातः जल्दी उठकर कर्म करने के बाद पूर्व दिशा या इशान कोने की और अपना मुख रख कर प्रथम आचमन करना चाहिए बाद में खुद के ललाट पर तिलक करना चाहिए।

Written by
Agraleaks Team

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