
शुक्रवार रात लगभग 9 बजे कीठम बर्ड सेंक्च्युरी में हाईटेंशन बिजली की लाइन से उठी चिंगारी के बाद भीषण आग लग गई थी। कुछ ही घंटों में टॉवर नंबर चार के आसपास का क्षेत्र आग की लपटों से घिर गया था। दमकलें पहुंचीं, लेकिन जंगल में झाड़ियों तक पहुंचने का रास्ता न होने के कारण किनारे की आग ही बुझा सकी। वन विभाग के कर्मचारी आग बुझान को रातभर जूझते रहे। शनिवार दोपहर एक बजे तक वे बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाते रहे। फिर भी जंगल में कई जगह आग सुलगती रही।
अजगर का पोस्टमार्टम, छटपटाते रहे पक्षी
जंगल में नील गाय, सेही, चींटीखोर, चीतल, अजगर, सांप, चूहा आदि आग की लपटों में घिर रहे। बड़े क्षेत्रफल में आग फैलने के कारण जमीन पर चलने और रेंगने वाले जीवों की जिंदगी संकट में पड़ गई। सांप, अजगर, सेही, चींटीखोर आदि ने गहरे बिल में छुपकर जान बचा ली। शिकार की तलाश में निकले कई अजगर और सांप ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। वन विभाग के कर्मचारियों ने जब आग लगे क्षेत्र का मुआयना किया तो इसमें एक अजगर, सांप, नील गाय और मोर की अस्थियां ही शेष मिलीं।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस आग में सिर्फ एक अजगर मरा है और उसका पोस्टमार्टम कराया गया है। अनिल कुमार, डीएफओ, वाइल्ड लाइफ का कहना है कि कीठम के लगभग तीन हेक्टेयर क्षेत्र में आग लगी थी। इस पर पूरी तरह काबू पा लिया गया गया है। अजगर के मरने की सूचना है। बाकी किसी अन्य जीव-जंतु के मरने की फिलहाल पुष्टि नहीं हो पाई है।
करीब आठ वर्ग किलोमीटर में फैला है कीठम
कीठम 7.97 वर्ग किमी में फैला है, इसे साल 1991 में वर्ड सेंक्च्युरी घोषित किया गया। वहीं, झील 2.25 वर्ग किमी में फैली है, यहां करीब 150 प्रजातियां हैं और करीब 300 अजगर हैं। यहां तोता, मोर, कोयल, स्पैरो, इंडियन रॉबिन, इंडियन सिल्वर विल वुड पैकर, इंडियन रिंग डव एशियन कोयल, लिटिल ईग्रेट, लार्ज ईग्रेट, कैटेलिक ईग्रेट, आशा परीना, ब्ल्यू रॉक पिजन, इंडियन रीफ बर्ड, हेरोन, नाइट हेरोन, हाउस क्रो, वाइल्ड क्रो आदि रहते हैं।
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