गोवर्धनलीक्स….. मुणिया पूर्णिमा के बाद गिरिराज महाराज की परिक्रमा में भक्ति और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देखने को मिला। श्रद्धा का सैलाब ऐसा कि परिक्रमा मार्ग में गिरिराज धरण में तो तेरी शरण की गूंज एक पहर के लिए भी नहीं थमी, भागदौड़ की जिंदगी की सब चिंताएं छोड़कर श्रद्धालु प्रेम भाव से गोवर्धन महाराज के चरणों में दंडवत हो गए। सुबह मंगला आरती में गिरिराज महाराज के दर्शन ने श्रद्धालुओं का भाव विभोर कर दिया, भक्तों की अश्रुधारा निकल रही थी, सुख दुख को देने वाले आराध्य श्री कृष्ण ने ग्वालों की रक्षा के लिए जिस गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था, ऐसा महसूस कर रहे थे कि वे ही प्रभु जिंदगी को पार लगाएंगे।

पिछले महीने मुणिया पूर्णिमा पर गोवर्धन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी, लाखों की संख्या में श्रद्धालु मुणिया पूर्णिमा मेला के दौरान परिक्रमा लगाने के लिए पहुंचे थे, कुछ उसी तरह का श्रद्धा का सैलाब शनिवार को श्रावण मास की अष्टमी पर देखने को मिला, परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से गिरिराज महाराज के भक्तों से भरा हुआ था। मुखारविंद के प्रवेश द्वार की भीड़ रात भर खत्म नहीं हुई। गोवर्धन महाराज और राधा कुंड की 7 कोस की परिक्रमा पूरी करने के बाद श्रद्धालु मुखारविंद दानघाटी पहुंचे।
मंगला श्रृंगार आरती दर्शन कर हो गए भाव विभोर
सुबह पांच बजे ठाकुर श्री गिरिराज महाराज मुखारविन्द विराजमान दानघाटी में मंगला आरती हुई। ठाकुर श्री गिरिराज महाराज मुखारविन्द विराजमान दानघाटी श्रीधामगोवर्धन
चरण सेवक पं. हर्षवर्धन कौशिक 'हनी पाठक' ने आरती कराई, उन्होंने बताया कि 31 अगस्त तक उनकी सेवा है। श्रावण मास में ब्रज भूमि के दर्शन करने चाहिए उसमें भी गिरिराज महाराज के दर्शन और परिक्रमा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। सुख शांति प्राप्त होती है, साल भर घर परिवार में खुशी का माहौल रहता है।