आगरालीक्स… आगरा के स्वास्थ्य केंद्र से दिल्ली से लेकर नेपाल तक बेचे जा रहे बच्चे, दो लाख में बेटी और चार लाख में बेटा। गिरोह में शामिल एक महिला सहित तीन अरेस्ट।
मथुरा पुलिस को बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश दीक्षित का शिकायती पत्र मिला। इसमें उन्होंने बताया कि जिन दंपती के बच्चे नहीं हैं उन्हें बच्चे उपलब्ध कराने के लिए विज्ञापन दिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस तरह के विज्ञापन चल रहे हैं। इसके बाद मथुरा पुलिस ने मानव तस्करी विरोधी ईकाई, विशेष किशोर पुलिस ईकाई और साइबर सेल की टीम ने जांच शुरू की।
बच्चा खरीदने की कहकर जाल में फंसाया गिरोह
मथुरा पुलिस ने सोशल मीडिया आईडी से डाटा निकलवाया, मोबाइल नंबरों की लॉकेशन ली गई। इसके बाद गिरोह द्वारा विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर दिल्ली के कपल बनकर कॉल की और बच्चे खरीदने की बात कहकर जाल में फंसा दिया। गिरोह के सदस्य ने बच्ची बेचने की बात कही और दो लाख रुपये में बच्ची देने के लिए तैयार हो गया।
बच्ची सहित गिरोह के सदस्य दबोचे
छह दिन से टीम गिरोह के संपर्क में थी, शनिवार को गिरोह के सदस्य नवजात बच्ची को लेकर मथुरा पहुंचे, यहां उन्हें टीम ने अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी गांव बांस बादाम , एत्मादपुर के रहने वाले धर्मेंद्र शर्मा, रामबाग के रहने वाले श्याम और वायु विहार कॉलोनी शाहगंज की रहने वाली रितु को अरेस्ट कर लिया।
बिचपुरी स्वास्थ्य केंद्र से खरीदी बच्ची, नर्स और आशा भी शामिल, 20 से 50 हजार में खरीदते थे नवजात
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने बच्ची बिचपुरी स्वास्थ्य केंद्र से खरीदी थी, गिरोह में आशा अनीता और विमलेश भी शामिल है। इसके साथ ही नर्स भी गिरोह में हैं। ऐसे महिलाएं जिनके पहले कई बच्चे हैं वे प्रसव कराने के लिए आती थी उनसे नर्स और आशा संपर्क करती थी। 20 से 50 हजार रुपये में नवजात को खरीद लेते थे और दो से पांच लाख में बेचते थे। मुनाफे में गिरोह के सभी सदस्यों की हिस्सेदारी थी। मुख्य सरगना धर्मेंद्र कथावाचक बनकर गिरोह संचालित कर रहा था।