आगरालीक्स ..आगरा में यमुना के लबालब होने से रबर डैम दिलो दिमाग में तस्वीर बनाने लगा है। डैम बनने से यमुना लबालब रहेगी, नाव में बैठकर ताजमहल देख सकेंगे।2017 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने रबर डैम का किया था शिलान्यास।

आगरा में लंबे समय से बैराज और अब रबर डैम की मांग चल रही है। पहले बैराज की जगह को लेकर असमंजय रहा, इसके बाद बैराज की जगह ताजमहल के डाउनस्ट्रीम यानी ताजमहल से आगे नगला पैमा पर रबर डैम बनाने पर सहमति बनी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2017 में नगला पैमा में रबर डैम का शिलान्यास किया लेकिन नीरी से एनओसी न मिलने के कारण रबर डैम का काम शुरू नहीं हो सका।
पिछले साल मिल चुकी है एनओसी, 20 करोड़ से बनना है डैम
नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटृयूट यानी नीरी से पिछले साल अप्रैल में ताजमहल के डाउनस्ट्री में रबर डैम बनाने के लिए एनओसी जारी कर दी गई। 20 करोड़ की लागत से रबर डैम बनना है इसमें 10 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण के लिए हैं। रबर डैम का बेस कंक्रीट से बनेगा और स्टील के गेट लगेंगे। इसमें रबर बैलून लगाए जाएंगे, ये बुलैट प्रूफ होंगे। रबर डैम के बलून को छोटा और बड़ा किया जा सकेगा। रबर डैम का जलस्तर 148 मीटर तक रहेगा।
यमुना में पानी रहने से ताजमहल की बढ़ेगी उम्र
ताजमहल की वास्तुकला को देखें तो यमुना का पानी अगर ताजमहल की दीवार को छूता है तो ताजमहल की उम्र को लंबी करेगा. बताया जाता है कि 50 कुओं पर यमुना की नींव टिकी हुई है. पूरी इमारत का वजन इन कुओं पर है. निर्माण के समय इन कुओं में आबनूस और महोगनी की लकड़ियों के लट्ठे डाले गए थे. इन कुओं को ऐसा डिजाइन किया गया थ्ज्ञा कि यमुना नदी से इन्हें नमी मिलती रहेगी, उतनी ज्यादा ताजमहल की मजबूती बनेगी.
एएसआई के एक अधिकारी के अनुसार ताजमहल की नीवं में बने कुओं को लगातार पानी मिलना जरूरी होता है, अगर इनको पानी नहीं मिलेगा तो ये असुरक्षित हो जाएगा. आबनूस की लकड़ी का इस्तेमाल इमारती सामान बनाने में ज्यादा किया जाता है. इसका कारण है कि ये भीगने पर और मजबूत होती है. ये भीगने पर न सड़ती है और न ही सिकुड़ती और न बढ़ती है. वहीं महोगनी की लकड़ी की बात करें तो ये भी एक अलग तरह की होती है. इस पर भी पानी का कोई असर नहीं होता है. इस लकड़ी का इस्तेमाल जहाज, फर्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजों और मूर्तियों को बनाने में किया जाता है. अपने औषधीय गुण के कारण इस लकड़ी में कोई भी रोग नहीं लगता है.