आगरालीक्स… आगरा में यमुना की बाढ़ से दुश्वारियों के साथ कुछ फायदे भी दे जाएगी। यमुना के जख्म भरेंगे। जमीन होगी बेहतर। ताजमहल की नींव को भी मिलेगी मजबूती।
45 साल बाद यमुना को मिला है अपना आकार

प्रकृति अपने नियमों के हिसाब से चलती है। यमुना नदी में बाढ़ 45 साल बाद आई है। इस लंबे अंतराल में यमुना नदी में काफी बदलाव आए। आबादी और संसाधन बढ़ने के साथ कंक्रीट के भवनों ने यमुना के अधिकार क्षेत्र में भी अतिक्रमण कर लिया। कई कॉलोनिया बन गईं। आबादी बढ़ती गई, नाले-नालियों का मुंह यमुना में मोड़ दिया गया। यमुना भी सिमटकर एक नाले के रूप में तब्दील हो गई। बाढ़ से दुश्वारियां तो बढ़ेंगी लेकिन कई फायदे भी हैं।
यमुना के लिए संजीवनी से कम नहीं पानी छोड़ा जाना
पहाड़ों पर हुई बारिश के बाद बांधों से यमुना में पानी छोड़ा जाना यमुना के लिए संजीवनी साबित हुआ है। 45 सालों में यमुना के जल, जमीन का दोहन हुआ है। यमुना की रेती का बड़े पैमाने पर खनन ने यमुना को गहरे-गहरे जख्म (गड्ढे) दिए हैं।
अवैध खनन से हुए यमुना के गड्ढे भर सकेंगे
यमुना को बाढ़ अपने साथ लाई गई पहाड़ों की रेत और गाद से नदी में अवैध खनन से बने गड्ढों को भरने में मदद मिलेगी। काफी समय से जो गहरे गड्ढे थे वह भी कम होंगे और यमुना से जो कटान होगा उसका लाभ मिलेगा।
पलेजा की खेती को जमीन होगी बेहतर, जलस्तल बढ़ेगा
यमुना में पलेजा की खेती करने वाले किसानों के लिए बाढ़ के बाद जमीन और बेहतर हो सकेगी, वह पलेजा की खेती और बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
ताजमहल की नींव को मिलेगी मजबूती
साथ ही बुजुर्गों का कहना है कि यमुना ताजमहल के पास आ गई है, जिससे उसकी नींव को मजबूती मिलेगी। जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी होगी।
78 की बाढ़ से कम है जलस्तर, पथवारी तक चली थी नावेः शलभ भारती शलभ

आगरा की बाढ़ के संबंध में कटघर लोहामंडी के रहने वाले वरिष्ठ कवि एवं गीतकार शलभ भारती शलभ का कहना है कि यमुना नदी में आई यह बाढ़ 1978 से आई बाढ़ से कम है। वह बताते हैं कि 45 साल पहले आई बाढ़ में बेलनगंज के पथवारी तक नाव चल गई थी लेकिन इसका स्तर अब काफी कम है।
आगरा में 1910 में भी आई थी बाढ़
इस बाढ़ की तुलना आगरा में 1910 में आई बाढ़ से करते हुए बताया कि बुजुर्ग बताते थे कि उस समय बाढ़ का पानी भी इसी तरह का था।