आगरालीक्स आगरा के 10 साल बाद दूसरा पद्मश्री, डाॅ. आरएस पारीक को होम्योपैथी के क्षेत्र में किए गए शोध कार्य और लोगों के बीच में होम्योपैथी पद्धति को स्थापित करने के लिए मिला पद्मश्री सम्मान।
91 साल के डाॅ. राधेश्याम पारीक का जन्म मार्च 1933 में नवलगढ़ राजस्थान में हुआ था, वहां से आगरा आ गए। यहां होम्योपैथी से इलाज कराना शुरू किया, इसके बाद इंग्लैंड से होम्योपैथी में ग्रेजुएशन करने चले गए, वे पानी के जहाज से इंग्लैंड पढ़ाई करने के लिए गए थे। होम्योपैथी के साथ साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी डाॅ. आरएस पारीक ने काम किया।
पूरा परविार ही डाॅक्टर
डाॅ. आरएस पारीक की पत्नी गीता रानी पारीक ग्रहणी हैं, तीन पुत्रियां और दो बेटे हैं, दोनों की डाॅक्टर हैं। डाॅ. आलोक पारीक और डाॅ. राजू पारीक। डॉक्टर आलोक पारीक इंटरनेशनल होम्योपैथी संघ के पहले भारतीय अध्यक्ष बने थे। डॉक्टर राजू पारीक सर्जन है डॉक्टर आर एस पारीक के बड़े पौत्र डॉक्टर प्रशांत पारीक भी सर्जन है छोटे पौत्र डॉक्टर आदित्य पारीक होम्योपैथिक चिकित्सक है और वह अमेरीका से प्रकाशित होने वाले द होम्योपैथी फिजिशियन जर्नल के सम्पादकीय मंडल के सदस्य है। प्रियंका पारीक एवं नितिका पारीक दोनों पौत्र वधु भी चिकित्सक है
करते हैं फ्री इलाज
डॉक्टर आर एस पारीक का गोवर्धन से विशेष रिश्ता है वह प्रत्येक माह के दूसरे एवं चौथे ब्रहस्पतिवार भगवान कृष्ण के भक्तों एवं राधा कुंड क्षेत्र मे रहने वाली सन्यासी माताओं का निशुल्क इलाज विगत कई वर्षों से कर रहे है और इसकी प्रेरणा स्रोत वह अपने आध्यात्मिक गुरु श्रद्धेय आदरणीय गया प्रसाद जी को मानते है