आगरालीक्स….पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का 89 साल की उम्र में निधन. 6 साल की उम्र में सीखीं थी संगीत की बारीकियां. खेले मसाने में होली… से मनाई लोगों के दिलों में जगह
शास्त्रीय गायक व उपशास्त्रीय गायक और पद्मविभूषण से अलंकृत पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का आज गुरुवार तड़के निधन हो गया। वे 89 साल के थे। उन्होंने सुबह 4.15 बजे बेटी नम्रता मिश्रा जी के मिर्जापुर स्थित घर पर अंतिम सांस ली। नम्रता ने बताया- अंतिम संस्कार आज शाम काशी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। पंडित छन्नूलाल मिश्र जी की तबीयत 7 महीने से खराब थी। हाल ही में वो 17 दिन हॉस्पिटल में एडमिट रहे थे। 11 सितंबर को मिर्जापुर में बेटी के घर तबीयत बिगड़ी। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। 13 सितंबर की रात BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। तबीयत में सुधार होने पर उन्हें 27 सितंबर को डिस्चार्ज किया गया। फिर वह बेटी के घर मिर्जापुर चले गए थे। पंडित छन्नूलाल मिश्र जी को बेटी नम्रता जी ने मिर्जापुर में हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।
BHU की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बताया था- पंडित छन्नूलाल जी को एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) है। फेफड़ों में गंभीर सूजन है। उन्हें टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और प्रोस्टेट बढ़ा है।
3 अगस्त 1936 में जन्मे
आगरा की डॉ. पूजा दुबे जो कि नम्रता मिश्र की दोस्त हैं, ने बताया कि आजमगढ़ के हरिहरपुर में जन्मे पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ स्थित हरिहरपुर में हुआ था। मैं उनके पैतृक आवास जाकर उनकी गांव पर यानी हरिहर पुर घराने पर डॉक्यूमेंट्री तैयार की है और मेरी पूरी मदद हरिहरपुर के प्रसिद्ध गायक पंडित भोलानाथ मिश्र जी और हरिहरपुर के प्रसिद्ध तबला नवाज पंडित कालीनाथ मिश्र जी ने किया उनके दादा पंडित गुदई महाराज सामता प्रसाद जी एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। पंडित छन्नूलाल जी ने छह साल की उम्र से ही अपने पिता पंडित बद्री प्रसाद मिश्र जी से संगीत की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। 9 साल की उम्र में उनके पहले गुरु किराना घराने के ‘उस्ताद अब्दुल गनी खान’ जी ने ख्याल सिखाया। इसके बाद ठाकुर जयदेव सिंह जी ने उन्हें प्रशिक्षित किया।
संगीत साधना की धार को और तेज किया
बिहार में संगीत की पढ़ाई, 4 दशक पहले वाराणसी आए पंडित छन्नूलाल जी को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए जाना जाता था। इनकी संगीत की शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। करीब 4 दशक पहले वाराणसी आए। यहां संगीत साधना की धार को और तेज किया। शास्त्रीय-लोक विधाओं के अनूठे संगम के लिए देश-दुनिया में विख्यात थे।
मोदी के प्रस्तावक रहे, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित हुए पंडित छन्नूलाल मिश्र जी ने धर्म नगरी काशी को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने यहीं रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की। वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2010 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। फिर 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने। वहीं 2021 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा गया।
खेले मसाने में होली…
संगीत छन्नूलाल जी का शास्त्रीय संगीत से पं. छन्नूलाल मिश्र जी ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनका खेले मसाने में होली का गीत आज भी हर किसी की जुबां पर है। बीते 2 साल से वह गुमनामी की जिदंगी जीने के लिए मजबूर थे। वजह उनके द्वारा बनाई गई संपत्ति है।
इनका परिवार
4 बेटियों में बड़ी बेटी संगीता जी का कोरोना के समय निधन हो चुका है। अनिता और ममता मिश्र जी की शादी हो गई है। सबसे छोटी बेटी नम्रता मिश्र जी “के बी पी जी कॉलेज ” में संगीत विभाग में प्रोफेसर हैं। पंडित छन्नूलाल मिश्र जी मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी नम्रता जी के घर पर ही रह रहे थे। बहनों और इकलौते भाई तबला वादक रामकुमार मिश्र जी में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है।
कोरोना से 4 दिन के अंदर पत्नी और बेटी की हो गई थी मौत
4 दिन में कोरोना से पत्नी और बेटी ने दम तोड़ा था पंडित छन्नूलाल मिश्रा जी की पत्नी मनोरमा मिश्रा की मौत 26 अप्रैल 2021 को हुई थी। वह कोरोना संक्रमित थीं और वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बाद 29 अप्रैल 2021 को बड़ी बेटी संगीता मिश्रा जी की मौत मैदागिन स्थित निजी अस्पताल में हुई। संगीता जी भी कोरोना संक्रमित थीं और 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। छन्नूलाल ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था।