
श्वेता गुप्ता के साथ उसके चार अन्य सहयोगी भी पुलिस की पकड़ में आए हैं। सभी कानपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं। श्वेता धूमनगंज में किराए का कमरा लेकर रह रही थी। वाहन चोरों के बड़े गिरोह की सरगना श्वेता को पुलिस पिछले दस रोज से खोज रही है लेकिन वह हाथ नहीं रही है।उसके तमाम थानेदारों और सीओ समेत पुलिस अफसरों और नेताओं से करीबी रिश्ते के चलते वह गिरफ्तारी से बचती रही है। लेडी डॉन श्वेता गुप्ता का नाम दस दिन पहले पुलिस की फरार अपराधियों की लिस्ट में जुड़ा।
दरअसल, झूंसी थाने के उपनिरीक्षक अमित मिश्रा आधी रात गश्त पर निकले थे तभी उन्होंने इंडिगो कार जाती देखी। उन्होंने कार रोककर उसमें मौजूद दो लोगों से पूछताछ शुरू की तो वे सकपका गए।पहले तो बहाना किया कि अपने पिता को लेने रेलवे स्टेशन जा रहे हैं लेकिन कार के कागजात मांगने पर वे भागने लगे। दरोगा ने किसी तरह कार रोक ली। एक बदमाश उतरकर भाग गया जबकि दूसरे को पुलिस ने दबोच लिया था।
पकड़े गए शीबू ने खुद को असम का मूल निवासी बताया। वह यहां चौफटका के पास किराए के कमरे में टिककर गाड़ियां चुराता था। शीबू से पूछताछ में ही पुलिस को पता चला कि कई जिलों में गाड़ियां चुराने वाले इस गिरोह की सरगना है एक महिला।
एसपी क्राइम अरुण पांडेय के मुताबिक, कानपुर में रहने वाली श्वेता गुप्ता एक्सीडेंटल गाड़ियों के कारोबार की आड़ में वाहनों और खासतौर से कारों की चोरी का गैंग चला रही है। तीन साल पहले उसने यहां ट्रांसपोर्ट नगर में भी किराए के मकान में दफ्तर खोला था।
कारोबार बताया था एक्सीडेंटल गाड़ियों को खरीदकर कबाड़ी मार्केट में बेचने का। मगर अब सच सामने आ गया है। पुलिस ने ट्रांसपोर्ट नगर के उस मकान को सील कर दिया है।
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