
आरोप के मुताबिक वह ३० मई को बलिया के फेफना में वाहन का इंतजार कर रही थी। उसे अपने मौसी के घर गाजीपुर जाना था। इसी दौरान उधर से गुजर रहे जनपद के पार्टी नेता की उस पर नजर पड़ी तो उन्होंने गाड़ी रोक दी और यह कहकर कार में बैठा लिया कि उन्हें भी उधर से ही जाना है। चूंकि कार में चालक के बगल वाली सीट पर पहले से ही कोई बैठा था इसलिए उन्हें पिछली सीट पर बैठना पड़ा। आरोप के मुताबिक गाड़ी थोड़ी ही दूर बढ़ी थी कि वह छेडख़ानी करने लगे। प्रतिरोध पर आपा खो बैठे और कपड़े आदि फाड़ डाले। हालांकि कड़े विरोध के चलते वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके। वह हिदायत देकर निकल लिए कि इस घटना का जिक्र किसी से किया तो बहुत बुरा होगा। पीडि़त महिला के मुताबिक जब उसने परिवार में घटना का जिक्र किया तो एफआइआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया। प्राथमिकी के लिए वह भीमपुरा थाने पहुंची तो यह कहकर लौटा दिया गया कि मामला यहां से संबंधित नहीं है। उसके बाद वह चितबड़ागांव थाने गई। वहां भी पुलिस ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया। आरोप के मुताबिक चूंकि मामला बीेएसपी के बड़े नेता का है इसलिएं एसपी ने भी रुचि नहीं ली। डीआइजी, आजमगढ़ मंडल प्रशांत कुमार ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। एसपी बलिया से मामले की जानकारी ली गई। उन्हें जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। दोषी पाए जाने पर कानून अपना काम करेगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
Leave a comment