आगरालीक्स… आगरा में पुलिस कस्टडी में संजय डॉन की मौत के 32 साल बाद सीबीआई कोर्ट ने छह पुलिस कर्मियों को
5 साल की सजा सुनाई है। टेलीग्राम को रिट मानकर सीबीआई ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फुलट्टी बाजार निवासी संजय डॉन के पिता मोहनलाल प्रहलाज बैंड में मैनेजर थे, संजय डॉन तीन भाई थे। दो मुंबई रहते थे। 10 अक्टूबर 1986 को एमएम गेट थाना पुलिस ने फुलट्टी बाजार निवासी संजय डॉन को सिंधी बाजार से पकड़ा था। संजय के साथ पुलिस ने लाखन उर्फ हप्पू को भी पकड़ा था। उसी दिन संजय के जीजा सुभाष ने डीएम और एसएसपी को एक टेलीग्राम किया था। यह आशंका जताई थी कि पुलिस संजय को मार देगी।
कंबल में लपेटकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था शव
11 अक्तूबर को लाखन को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। उसने दीवानी में बताया कि संजय नहीं आएगा। वह मर चुका है। इस जानकारी के बाद सैकड़ों की संख्या में भीड़ एमएम गेट थाने पहुंची थी। वहां थाने की हवालात धुली मिली। संजय का शव कंबल में लपेटकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। हंगामा होने पर अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने उस समय यह तर्क दिया था कि संजय ने हवालात में खुद को बोतल से जख्मी कर लिया था। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
टेलीग्राम का सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
इस संबंध में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक टेलीग्राम भेजा। उसने में पुलिस को हत्या का दोषी बताया। सुप्रीम कोर्ट ने उसका संज्ञान लिया। जिला प्रशासन ने शपथपत्र प्रस्तुत किए। मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट संलग्न की गई। सुनवाई हुई। एक तारीख पर वह भी कोर्ट में पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश दिए। यह आदेश 11 अगस्त 1988 को हुए थे। आज फैसला आया है। उस समय सीबीआई कोर्ट देहरादून में होती थी। सीबीआई ने 19 पुलिस कर्मियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस कर्मियों को जेल भेजा गया था। लंबे समय बाद वे जमानत पर रिहा हुए थे। अब इस केस में सीबीआई कोर्ट का फैसला आया है।