आगरालीक्स…सावन के दूसरे मंगलवार को सावन की शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का दुर्लभ महासंयोग…जानिए क्यों खास है सावन माह का दूसरा मंगलवार.
इस साल सावन मास में दूसरे मंगला गौरी व्रत और सावन मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार यह संयोग कल यानी 11 अगस्त 2026, मंगलवार को पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार ऐसा संयोग कई वर्षों बाद बनता है जब शिव को समर्पित शिवरात्रि और शक्ति को समर्पित मंगला गौरी व्रत एक ही दिन पड़ें। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार उत्तर भारत में सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हुई है और समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा पर होगा।
इस माह में कुल 4 मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे –
पहला – 4 अगस्त 2026
दूसरा – 11 अगस्त 2026
तीसरा – 18 अगस्त 2026
चौथा – 25 अगस्त 2026
दूसरे व्रत को लेकर पंचांग में स्पष्ट उल्लेख है कि – दूसरा व्रत, इस दिन सावन शिवरात्रि का भी खास संयोग रहेगा।
तिथि, शुभ मुहूर्त और शुभ योग –
तिथि: 11 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसी तिथि को प्रत्येक माह मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
शुभ मुहूर्त –
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:24 से 05:08 तक
मंगला गौरी पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 06:00 से 08:30 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से 12:51 तक
मासिक शिवरात्रि निशिता काल पूजा: रात्रि 12:02 से 12:47 तक (12 अगस्त की मध्यरात्रि)
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 11 अगस्त सुबह 08:15 से
चतुर्दशी तिथि समापन: 12 अगस्त सुबह 10:40 तक
शुभ योग : इस दिन सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। मंगलवार को मंगल का स्वयं का दिन और शिवरात्रि पर शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा से यह योग अखंड सौभाग्य और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
महत्व – क्यों है यह संयोग दुर्लभ
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, जबकि मंगलवार का दिन माता पार्वती के गौरी स्वरूप को समर्पित है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व: धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है। कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
सावन शिवरात्रि का महत्व: सावन मास की शिवरात्रि को साल की सबसे बड़ी मासिक शिवरात्रियों में से एक माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण से कालसर्प, वैवाहिक बाधा और जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की जब दोनों व्रत एक साथ पड़ते हैं तो इसे शिव-शक्ति मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन में प्रेम, संतान सुख और अखंड सुहाग का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है।
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि :
मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
मंदिर की सफाई के बाद लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और चौकी पर मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा को विराजमान करें।
रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
माता पार्वती को 16 सोलह श्रृंगार की सभी वस्तुएं अर्पित करें। व्रत कथा का पाठ करें, पार्वती चालीसा और मंत्रों का जप करें।
शिवरात्रि पूजन (शाम को) :
शाम को शिवालय में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, शहद से अभिषेक करें। बेलपत्र पर चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर अर्पित करें। “ॐ गौरीशंकराय नमः” मंत्र का 108 बार जप विशेष फलदायी रहेगा।
व्रत के नियम –
व्रत के दौरान किसी से भी वाद-विवाद भूलकर भी नहीं करना चाहिए। मन को शांत रखकर पूजा करें।
इस दिन काले रंग के कपड़े धारण न करें।
तामसिक चीजों का सेवन न करें।
नोट : जो महिलाएं मंगला गौरी व्रत करती हैं, उन्हें पांच साल पूरे होने के बाद सावन के अंतिम मंगलवार को विधिपूर्वक उद्यापन करना चाहिए।