गाजियाबादलीक्स आपके बच्चे को मोबाइल गेम की लत तो नहीं, सॉरी पापा, मोबाइल गेम नहीं छोड़ पा रहे हैं, 9 वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन बहनों के 18 पन्नों के सुसाइड नोट से हर कोई सन्न।
मंगलवार देर रात गाजियाबाद के टीलामोड थाना क्षेत्र के भारत सिटी सोसायटी के टावर बी-1 फ्लैट नंबर 907 आनलाइन ट्रेडिंग का काम करने वाले चेतन अपने परिवार के साथ अपार्टमेंट में नौवीं मंजिल पर रहते हैं। उनकी चार बेटी 16 वर्ष, 14 वर्ष, 12 वर्ष पुत्रियां, तीन वर्ष और एक बेटा है। मंगलवार देर रात 2.30 बजे तीनों बहनों 16 वर्ष, 14 वर्ष, 12 वर्ष ने नौवीं मंजिल से नीचे कूंदकर जान दे दी। मंगलवार देर रात 2.30 बजे नौवीं मंजिल से कूंदकर तीन बहनों के जान देने की सूचना पर पुलिस पहुंच गई। तीनों को अस्पताल ले जाया गया लेकिन तीनों की नौवीं मंजिल से गिरने से मौत हो गई। जिस समय यह घटना हुई चेतन अपनी पत्नी के साथ दूसरे कमरे में सो रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बहन कोरियन टास्क बेस्ट गेम खेल रहीं थी, उनके मोबाइल में भी गेम एप मिला है। अतुल कुमार सिंह, सहायक पुलिस आयुक्त शालीमार गार्डन के अनुसार, भारत सिटी सोसायटी के टावर बी-1 फ्लैट नंबर 907 की नौवीं मंजिल से बालकनी से तीन बच्चियों के कूदने और मौत होने की सूचना मिली थी, जांच की जा रही है।
सॉरी पापा हम गेम नहीं छोड़ सकतीं, तीन साल से खेल रहीं थीं गेम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पर्ची भी मिली हैं, इसमें बच्चियों ने लिखा है कि सॉरी पापा हम गेम नहीं छोड़ सकती हैं। कोरियन गेम हमारी जिंदगी हमारी जान है। चेतन का कहना है कि तीनों बेटियां तीन साल से कोरियन गेम खेल रहीं थीं। पिछले दो साल से स्कूल भी नहीं जा रहीं थीं और दिन भर गेम खेलती रहतीं थीं। लोगों से भी बात नहीं करतीं थी यही कहती थीं कि हमें कोरिया जाना है।

चेतन ने की थी दो शादियां, दोनों पत्नियों के साथ रह रहा था चेतन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चेतन की पहली पत्नी से कोई संतान न होने पर उसने साली से दूसरी शादी कर ली थी उससे तीन बेटियां हुईं। इसी दौरान पहली पत्नी से एक बेटा और एक बेटी भी हो गई, वह दोनों पत्नियों के साथ ही रहता था और मंगलवार को वह कमरे में अपनी दोनों पत्नी, बेटे और तीन साल की बेटी के साथ सो रहा था जबकि तीनों बेटियां अलग कमरे में सो रहीं थीं।
मोबाइल गेम की लत है जानलेवा
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर के अनुसार, मोबाइल गेम की लत बच्चों के लिए घातक हो रही है। धीरे धीरे ये गेम खेलने में ज्यादा समय लगाने लग जाते हैं और समाज से कट जाते हैं। वर्चुअल दुनिया को ही सही मानते हैं, इसमें टास्क दिए जाते हैं इन्हें पूरा करने के लिए कुछ भी करने का तैयार रहते हैं इसलिए इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं।
बच्चों को समय दें, उनसे बातें करें
मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए 30 मिनट से ज्यादा ना करने दें
मोबाइल अपने सामने इस्तेमाल करवाएं
बच्चों को खेलकूद गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें