आगरालीक्स… यमुना एक्सप्रेस-वे पर हादसों का कारण आईआईटी दिल्ली की टीम ने पता कर लिया है, अब आगरा से दिल्ली तक स्पीड कैमरे लगाए जाएंगे, आईआईटी दिल्ली की टीम द्वारा किए गए यमुना एक्सप्रेस वे के आडिट के बाद स्पीड कैमरे लगाने की सिफारिश की है।
आइआइटी दिल्ली की टीम ने ग्रेटर नोएडा से आगरा तक एक्सप्रेस वे के हर किलोमीटर का बारीकी से ऑडिट कर अपने सुझाव दिए हैं। एक्सप्रेस वे पर हादसे का सबसे बड़ा कारण वाहनों की तेज रफ्तार है। इस पर अंकुश के लिए सीईओ ने ग्रेटर नोएडा से आगरा तक एक्सप्रेस वे की पूरी निगरानी के लिए स्पीड कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
आइआइटी दिल्ली ने यमुना प्राधिकरण को अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंप दी है। प्राधिकरण गुरुवार को आइआइटी दिल्ली के साथ बैठक कर इस रिपोर्ट पर मंथन करेगा। जेपी इंफ्राटेक ने रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं को लागू करने पर अपनी सहमति भी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा के लिए गठित समिति ने यमुना प्राधिकरण को यमुना एक्सप्रेस वे का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण ने आइआइटी दिल्ली की टीम से सुरक्षा ऑडिट कराया है। उसने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह को सौंप दी है। आइआइटी दिल्ली की टीम ने ग्रेटर नोएडा से आगरा तक एक्सप्रेस वे के हर किलोमीटर का बारीकी से ऑडिट कर अपने सुझाव दिए हैं। एक्सप्रेस वे पर हादसे का सबसे बड़ा कारण वाहनों की तेज रफ्तार है। इस पर अंकुश के लिए सीईओ ने ग्रेटर नोएडा से आगरा तक एक्सप्रेस वे की पूरी निगरानी के लिए स्पीड कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
केवल 24 कैमरे लगे हैं
एक्सप्रेस वे पर मात्र 24 स्पीड कैमरे लगे हैं। ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट से जेवर टोल प्लाजा तक एक भी कैमरा नहीं है। जेवर से मथुरा के बीच पांच स्पीड कैमरे हैं।इसलिए वाहन चालक धड़ल्ले से तेज रफ्तार में गुजरते हैं। ग्रेटर नोएडा से आगरा तक कैमरे लगने से किसी भी ¨बदु पर वाहन की रफ्तार को रिकार्ड करना संभव होगा। सुरक्षा के लिहाज से भी कैमरे फायदेमंद होंगे। चालान व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश सरकार से एक्सप्रेस वे के लिए डेडीकेटिड पुलिस की तैनाती की संस्तुति की जाएगी। एक्सप्रेस वे पर नौ जगहों पर वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था है।