आगरालीक्स.. युवाओं का पुरुषत्व कम हो रहा है, उनके शुक्राणुओं की संख्या कम होने के साथ ही गति में भी बदलाव आया है, आगरा में चल रही कांफ्रेंस में डॉक्टरों का कहना है कि 10 फीसद लोगों में नपुंसकता है।
यूरोलॉजिस्ट व एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. अजित सक्सेना ने होटल मुगल में यूरोलॉजीकल सोसायटी ऑफ इंडिया नार्थ जोन की वार्षिक कांफ्रेंस में दूसरे दिन अपने प्रजेन्टेशन के दौरान दी।
उन्होंने बताया कि प्रदूषण, तनाव और नशा शुक्राणुओं की डिवाइडिंग कोशिकाओं का आक्सीडेशन कर देते हैं। आक्सीडेशन की मात्रा बढ़ने से इनकी गुणवत्ता व संख्या पर असर पड़ता है। नपुंसकता के साथ यह कारक गर्भस्थ शिशु में मानसिक व शारीरिक विकृतियों का कारण भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि एंटीऑक्सीडेंस दवाओं से इस समस्या को कम किया जा सकता है। लेकिन बेहतर है कि लोग अपनी लाइफ स्टाइल और खान-पान को सुधारें। फास्ट फूड के बजाय एंटीआक्सीडेंट युक्त हरी सब्जियां खाएं। स्ट्रेस को मैनेज करना सीखें। घर का काम आफिस में न ले जाएं और आफिस के काम को घर में न लाएं। फास्ट फूड से तौबा करें। पौष्टक और संतुलित आहार के साथ शारीरिक व्यायाम को भी महत्व दें।
डब्ल्यूएचओ का आंकड़े
शुक्राणुओं की संख्याः 120-15 मिलियन तक पहुंच गई है। जबकि पहले 60 से कम नहीं होती थी।
मोबिलिटीः 60 प्रतिशत से घटकर 32 प्रतिशत तक पहुंची।
आकार (मार्फोलॉजी) अब 4 प्रतिशत तक ठीक माना जाने लगा है। जबकि पहले 20 प्रतिशत तक होता है।
गुटखा, पान मसाला व खारा पानी बढ़ा रहा पथरी की समस्या
आगरा। कांफ्रेंस के आयोजक चेयरमैन डॉ. एमएस अग्रवाल ने बताया कि निश्चित आंकड़े तो नहीं, लेकिन निसंदेह पथरी के मामलों में इजाफा हो रहा है। इसकी एक मुख्य वजह ग्राउंड वॉटर का सीधा उपयोग और गुटखा व पान मसाला हैं। एक बार पथरी होने पर 5 वर्ष में लगभग 50 फीसदी लोगों में दोबारा पथरी होने की सम्भावना होती है। इसलिए जिन्हें पथरी की समस्या हो चुकी हैं, उन्हें खासतौर पर नमक और रेड मीट का प्रयोग कम करना चाहिए। पानी खूब पीएं लेकिन सीधे ग्राउंड वॉटर का प्रयोग न करें। 20-30 वर्ष के युवाओं में पथरी के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं।
बिना छेद के ऑपरेशन से बी निकल सकती है गुर्दे की पथरी
आगरा। आर्गनाइजिंग सचिव डॉ. विजय बोरा ने बताया कि आरआईआरएस (रिट्रोग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी) विधि से अब गुर्दे की पथरी को बिना किसी छेद के ऑपरेशन के निकाला जा सकता है। इसमें मूत्र नली के रास्ते से गुर्दे की पथरी को निकाला जाता है, जिसमें ऑपरेशन के दौरान कोई छिद्र नहीं किया जाता। डॉ. बोरा ने बताया कि सिट्रेट युक्त (नींबू, संतरा,) खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पथरी होने की सम्भावना कम होती है। इसलिए जिन्हें पहले पथरी की समस्या हो चुकी है, उन्हें सिट्रेट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अदिक करना चाहिए।
कल होगा समापन
आगरा। तीन दिवसीय यूरोलॉजीकल सोसायटी ऑफ इंडिया नार्थ जोन की वार्षिक कांफ्रेंस का समापन 15 अक्टूबर को शाम 5 बजे होगा। कांप्रेंस में कुल 206 रिसर्च पेपर पढ़े गए हैं। यह जानकारी कांप्रेंस के आर्गनाइजिंग को-चेयरमैन डॉ. अनुराग यादव ने दी।
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