आगरालीक्स … आगरा के युवा चिकित्सक ने कहा कि हर 10 साल में नई पीढ़ी के विचारों में अंतर महसूस किया जा सकता है। गुरुवार को थियोसोफिकल सोसायटी, निर्वाण लाॅज, आगरा की ओर से स्व. डा. एसएन मल्होत्रा के स्मृति दिवस पर स्मृति व्याख्यान मुख्य वक्ता उनके प्रपौत्र युवा डाॅक्टर केशव मल्होत्रा ने कहा कि जनरेशन एंड कन्वरसेशन विषय पर संबोधित करते हुए डा. केशव मल्होत्रा ने जो कहा उसे सुनकर हर कोई स्तब्ध था। अपने दादाजी की पीढ़ी के मध्य उनके विचारों को सुनकर अधिकांश बुजुर्गों का कहना था कि एक युवा डाॅक्टर होने के नाते वे डा. केशव से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े किसी व्याख्यान की अपेक्षा रख रहे थे, लेकिन डा. केशव ने पुरानी और नई पीढ़ी के बीच तालमेल के ह्दय स्पर्शी व्याख्यान ने उन्हें चैंका दिया है। उन्होंने कहा कि यह कोई मामूली बात नहीं है।

वहीं डा. केशव ने पुरानी और नई पीढ़ी से जुडे़ तमाम बिंदुओं पर बात की। कहा कि नई पीढ़ी का वैश्विक नामकरण संभव है, क्योंकि इस पीढ़ी की लगाम डिजिटल टेक्नोलाॅजी के हाथ है और इसकी प्रकृति वैश्विक है। प्रौद्योगिकी का आगमन चूंकि नई सदी या मिलेनियम के साथ हुआ है, इसलिए इस पीढ़ी को मिलेनियल्स नाम नसीब हुआ है। इस नामकरण के पीछे भी मजबूत तर्क हैं। भारत में खासतौर पर हम देखते हैं कि मोबाइल फोन ने इस पीढ़ी को एक खास चरित्र से नवाज दिया है। हर 10 साल में एक नई पीढ़ी के साथ विचारों का अंतर देखने को मिलता है। कहा कि हर पीढ़ी को अपने संस्कार और विचार अपनी आने वाली पीढ़ी को विरासत में देने हैं नहीं तो आने वाली यह पीढ़ी आपको महत्वहीन बना देगी। वहीं नई पीढ़ी को सुनना आना चाहिए, क्योंकि अगर वे सुनेंगे नहीं तो वे अपने से पहले वाली पीढ़ी के अनुभवों से महरूम ही रहेंगे, जो जीवन भर उनके काम आने वाले हैं। हालांकि यह सही है कि हर पीढ़ी की अपनी एक सोच होती है, लेकिन अगर संवाद में कमी हो भी तो कुसंवाद नहीं होना चाहिए। कोई भी जनरेशन हो हमारा मकसद किसी भी व्यक्ति की आलोचना या उसे गुमराह करने का नहीं होना चाहिए।
इससे पूर्व सोसायटी के अध्यक्ष एलएस सेंगर, पूर्व अध्यक्ष डा. आरएम मल्होत्रा, सचिव आरपी शर्मा, उपाध्यक्ष डा. प्रतिभा शर्मा, डा. निहारिका मल्होत्रा आदि ने स्व. डा. एसएन मल्होत्रा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रृ़द्धासुमन अर्पित किए। संचालन ज्ञानेश चतुर्वेदी ने किया।