आगरालीक्स…आगरा में हार्डी बम कांड के प्रमुख नायक क्रांतिकारी वासुदेव गुप्त 36वीं पुण्यतिथि पर नमन. 1940 में राम बारात देख रहे अंग्रेज कलेक्टर हार्डी पर किया था बमों से हमला..हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत
देश की जंगे आजादी में आगरा के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई थी. आगरा के बेलनगंज में स्थित बरौलिया बिल्डिंग कई ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी है. 27 सितंबर 1940 को आगरा के क्रांतिकारियों ने ऐसी घटना को अंजाम दिया जिससे अंग्रेजी हुकूमत की चूल्हें हिल गई थीं. इसी बिल्डिंग के नीचे उस वकत् का आगरा का केक्टर हार्डी बैठा हुआ था और वह राम बारात देख रहा था. आगरा के क्रांतिकारियों ने बिल्डिंग के सामने बने ब्रिज से हार्डी के ऊपर बम फेंका जिसमें वह बुरी तरह से घायल हो गया. इस घटना का जिक्र कई किताबों में मिलता है. यह बम उस वक्त के क्रांतिकारी रोशनलाल गुप्त, वासुदेव गुप्त और रामप्रसाद भारती ने फेंका था.इन्हीं क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से एक वासुदेव गुप्त की आज 36वीं पुण्यतिथि है. स्वर्गीय पूज्यनीय श्री वासुदेव अग्रवाल (गुप्त) जी हार्डी बमकांड बरौलिया बिल्डिंग बेलनगंज आगरा के प्रमुख क्रांतिकारी थे. श्री वासुदेव अग्रवाल जी का जन्म सन 1914 में जगनेर तहसील खेरागढ़ आगरा में हुआ था. दादाजी का गोकुलवास 19 अगस्त 1989 में हुआ. महान क्रांतिकारी हमारे दादाजी वासुदेव अग्रवाल की अंतिम यात्रा पूरे राजकीय मान सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय तिरंगा पहना कर की गई.
दादा जी वासुदेव गुप्त के बारे में जानेंश्री दादाजी ने सन् 1937 " आशा पत्र " का प्रकाशन किया, जिसका संपादन भार उन्होंने अपने परम मित्र स्वर्गीय श्री रोशन लाल गुप्त करुणेश जी को दिया. सन् 1940 में अंग्रेजों के अत्याचारों के समाचारों को प्रकाशित करने पर अंग्रेजी हुकूमत ने इस पत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था. समाचार पत्र के प्रतिबंध के विरोध में श्री दादाजी ने सन् 1940 में त्रिकंटक दल की स्थापना की. श्री दादाजी के साथ उनके साथी श्री रामप्रसाद भारतीय जी एवं उनके परम मित्र श्री रोशनलाल गुप्त करुणेश जी थे. श्री दादाजी के दल ने बेलनगंज बरौलिया बिल्डिंग के नीचे बैठ कर राम बरात देख रहे कलक्टर डीपी हार्डी पर बमों से हमला कर करके इस कांड को अंजाम दिया. इस कांड के बाद दादाजी को हिरासत में ले लिया गया. अंग्रेजी पुलिस ने दादाजी को कई अमानवीय यातनाएं दी, लेकिन उन्होंने हार्डी बम कांड का रहस्य नहीं खोला, न ही अपनी भूमिगत साथियों के नाम, पता प्रकट किए. श्री दादाजी 'अखिल भारतीय क्रांतिकारी सम्मान समिति' के अध्यक्ष एवं 'आगरा शहर स्वाधीनता संग्राम सेनानी समिति' के उपाध्यक्ष थे। 15 अगस्त 1972 स्वतंत्रता के पच्चीसवें वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र की ओर से श्री वासुदेव अग्रवाल (गुप्त) जी को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने ताम्रपत्र भेंट किया गया था. भारत देश की आजादी के लिए हमारे दादाजी का स्वर्णिम योगदान रहा.