
यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने साकेत कुमार और अन्य की याचिकाओं को मंजूर करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि दारोगा भर्ती की परीक्षा में यह निर्देश था कि ओएमआर सीट में वाइटनर या ब्लेड का प्रयोग वर्जित है। भर्ती बोर्ड का यह निर्देश बाध्यकारी प्रकृति का था, ऐसे में इसका उल्लंघन करने वालों की गलती थी। अदालत ने भर्ती बोर्ड की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि बोर्ड ने स्वयं के निर्देशों का उल्लंघन करने और उनका पालन करने वालों को एक समान रखा, जो अनुचित था। बोर्ड का यह कृत्य मनमानी और विभेदकारी है। न्यायालय ने कहा कि यह भर्ती एक अनुशासनिक फोर्स की है, जहां मौखिक आदेश भी महत्व रखते हैं। यह उचित होगा कि समूचा परिणाम रद न कर केवल वाइटनर या ब्लेड का प्रयोग करने वालों को अंतिम चयन सूची से बाहर कर दिया जाए। न्यायालय ने 16 मार्च 2015 को घोषित परिणाम को आंशिक रूप से रद कर दिया। ध्यान रहे, दारोगा भर्ती परीक्षा में 14,256 अभ्यर्थी प्रमुख परीक्षा में बैठे थे। कुल 3038 अभ्यर्थी चयन सूची में अंतिम परिणाम में पास हुए, उनमें से 810 ने वाइटनर या ब्लेड का प्रयोग किया था।
विशेष अपील करेंगे हारे अभ्यर्थी
वाइटनर या ब्लेड का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों के अधिवक्ता विजय गौतम ने कहा है कि इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में विशेष अपील की जाएगी। एकल जज के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है, जिस चुनौती दी जाएगी।
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