
यूपीएफडीए के कमिश्नर पी. के. सिंह के मुताबिक मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया पर मुकदमा दर्ज करने के लिए आदेश की कॉपी शुक्रवार को बारांबकी में फूड डिपार्टमेंट को भेज दी गई है। शनिवार को बाराबंकी सीजेएम कोर्ट में नेस्ले कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। ये मुकदमा लैब जांच रिपोर्ट में मैगी के अनसेफ और मिस ब्रांडेड होने के चलते दर्ज होगा।
पिछले दिनों यूपी के बाराबंकी जिले से मैगी के 12 अलग-अलग सैम्पल लेकर केंद्र सरकार की कोलकाता स्थित लैब में टेस्ट कराया गया। मैगी के इन पैकेटों में लेड की मात्रा 17.2 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) पाई गई है, यह स्वीकार्य सीमा से लगभग सात गुना ज्यादा है। एफडीए के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल डीजी श्रीवास्तव के मुताबिक मैगी नूडल्स में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामैट (एमएसजी) की मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई है। लेड की स्वीकार्य योग्य सीमा 0.01 पीपीएम से 2.5 पीपीएम के बीच है। एफडीए ने ये सारी जानकारी एक चिट्ठी लिख FSSAI को दी थी।
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