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War between two Earth’s inhabitants over space occupation# agra news

आगरालीक्स….इंटरनेट की दुनिया में तेज गति पाने के लिए.अंतरिक्ष में सैटेलाइट लांच करने की लगी होड़…..जानिए पूरी खबर.

अब अंतरिक्ष पर कब्जे को लेकर पृथ्वी के दो बड़े धनपतियों के बीच संघर्ष शुरू हो गया है. स्पेसएम्स के स्वामी एलन मस्क और अमेजॉन के संस्थापक जेफ बेजोस अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में उपग्रह लॉच करना चाहते हैं. दोनों धनपति इऩ उपग्रहों के जरिये पृथ्वी पर इंटरनेट की सप्लाई करने के मसूंबा बना चुके हैं.

एलन मस्क के स्वामित्ववाली स्पेसएम्स ने पिछले दिनों अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन से मांग की है की उनके स्टारलिंक उपग्रह को अंतरिक्ष की निचली कक्षा में ऑपरेट करने की अनुमति दी जाए. जबकि एमेजॉन के बेजोस ने कहा है कि एलन मस्क की कंपनी को अनुमति दी गई तो उनके कूइपर उपग्रह में  हास्तक्षेप और टक्कर का खतरा बढ़ जाएगा.

अंतरिक्ष से इंटरनेट सेवा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक स्पेसएम्स की तरह एमेजॉन ने भी अंतरिक्ष से इंटरनेट सेवा देने के लिए ही उपग्रह डिजाइन किये हैं. दुनिया के दो बड़े दिग्गज रहिसों का अंतरिक्ष में उपग्रह के जरिये इंटरनेट सेवा देने का सपना है. एमेजॉन ने बीती 26 जनवरी को ट्वीट करके कहा,’’यह स्पेसएम्स का प्रभावित बदलाव है, जो सैटेलाइट सिस्टम के बीच प्रतियोगिता का खत्मा कर रहा है.’’ एमेजॉन का कहना है कि इससे स्पेसएम्स का तो हित होगा ही अंतरिक्ष में गलाकाट प्रतिस्पर्धा हो लेकिन निश्चित रूप से यह जनहित में नहीं है. एमेजॉन के इस ट्वीट पर एलन मस्क ने भी पलटवार करते हुए कहा कि यह जनहित में नहीं होगा कि संचालन से एक वर्ष पीछे चल रहे एमेजॉन के सैटेलाइट सिस्टम के लिए स्टारलिंक उपग्रह को कमजोर कर दिया जाए.

अंतरिक्ष में निजी उपग्रहों की बाढ़

एलनमस्क की कंपनी स्पेसएम्स अपने स्टारलिंक इंटरनेट सिस्टम के लिए अब तक एक हजार उपग्रह लांच कर चुका है. इसके जरिये अमेरिका, कनाडा, और ब्रिटेन के उपभोक्ताओं को इंटरनेट की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है. एमेजॉन को कम्युनिकेशन कमीशन से बीते वर्ष 3,236 उपग्रहों को लांच करने की अनुमति मिल गई है.

दरअसल स्पेसएम्स ने फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन से इसलिए अपने उपग्रहों को अंतरिक्ष की निचली कक्षा में स्थापित करने की इजाजत मांगनी पड़ी ताकि स्पेसएम्स तेज गति से इंटरनेट सेवा अपने ग्राहकों को मुहैया करा सकें.एमेजॉन ने स्पेसएम्स की इस मांग का विरोध किया है.

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