आगरालीक्स…आगरा के पर्यटन उद्योग को इस साल लगे पंख। ऐतिहासिक इमारतों पर रिकॉर्ड दर्शक। नई पर्यटन नीति से भी उम्मीदें जगीं।
पूरे साल सैलानियों की बना रहा जमावड़ा

आगरा के पर्यटन उद्योग के लिए वर्ष-2022 से नई उम्मीदें जगी हैं। प्रमुख पर्यटन स्थल ताजमहल, लालकिला, एत्माद्दौला, सिकंदरा, पतेहपुर सीकरी पर इस बार पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या रही।
होटल उद्योग और हैंडीक्राफ्ट व्यवसाय को राहत

होटल उद्योग को भी अच्छी आय हुई। बड़ी हस्तियां यहां ताजमहल देखने आईं और यहां देसी-विदेशी पर्यटक भी रुके। ताजमहल को ही लाखों दर्शकों ने निहारा और टिकटों की मारामारी रही। हैंडीक्राफ्ट के काम भी जान आई।
65 लाख पर्यटक, 100 करोड़ तक की कमाई

ताज देखने के लिए हर साल करीब 60 से 65 लाख देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं। ताजमहल राज्सव के मामले में देशभर में नंबर एक पर है। ताज के म्यूजियम की टिकट की राशि को भी जोड़ लें तो एक साल में यहां 100 करोड़ रुपये से अधिक की टिकट बिकती हैं।
ताजमहलः भारतीय पर्यटकों को टिकट 250 का
भारतीय पर्यटकों के लिए यहां 250 रुपये में टिकट उपलब्ध होती है। विदेशी पर्यटक को 1300 रुपये का टिकट बेचा जाता है।
मुख्य मकबरे पर जाना होता है महंगा
भारतीय पर्यटकों को प्रवेश के लिए 50 रुपये का टिकट लेना होता है। मुख्य मकबरे पर जाने के लिए 200 रुपये का टिकट अलग से लगता है।
विदेशी पर्यटकों को टिकट 1300 का
विदेशों से आने वाले पर्यटकों को ताजमहल में प्रवेश के लिए 1100 रुपये का टिकट लेना पड़ता है। इसके बाद मुख्य मकबरे के लिए 200 रुपये का टिकट लेना होता है। इस तरह से एक विदेशी पर्यटक को 1300 रुपये तो भारतीय पर्यटक को 250 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
सार्क देशों के लिए 700 रुपये का टिकट
सार्क देशों के पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 500 रुपये और मुख्य मकबरे का टिकट 200 रुपये का है।
देश में टिकट बिक्री में नंबर-1 है ताजमहल
ताजमहल टिकट बिक्री के मामले में देश में पहले नंबर पर है। वर्ष-2019-20 में 97.11 करोड़ रुपये के टिकट बिके थे। जबकि ताज परिसर के म्यूजियम के करीब 9 करोड़ रुपये के टिकट बिके थे। 2018-19 में 78 करोड़ के टिकट बिके थे।
रखरखाव पर इतना होता है औसतन खर्च
ताज के रखरखाव की बात करें तो 2019-20 में 4.73 करोड़ और 2018-19 में 5.30 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
प्रदेश की नई पर्यटन नीति-2022 से उम्मीदें
आगरा के पर्यटन उद्योग को प्रदेश सरकार की नई पर्यटन नीति-2022 से भी पर्यटन उद्योग को खासी उम्मीद जगी है। इस पर्यटन नीति से आध्यात्मिक, वाइल्ड लाइफ व ईको टूरिज्म सर्किट से आगरा के पर्यटन में नए रंग जुड़ने की राह पर चल पड़े हैं।
बटेश्वर, चंबल और कीठम का है जिक्र

प्रदेश की पर्यटन नीति में आध्यात्मिक सर्किट में आगरा के बटेश्वर को शामिल किया गया है। यमुना किनारे बने शिव मंदिरों की श्रृंखला के साथ ही यहां शौरीपुर स्थित जैन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं।
चंबल सेक्चुरी-सूर सरोवर पर्यटन के नये केंद्र
वाइल्ड लाइफ एवं ईको टूरिज्म सर्किट पर भी पर्यटन नीति में जोर देने की बात कही गई है। चंबल सेंक्चुरी और सूर सरोवर पक्षी विहार ईको पर्यटन के बड़े केंद्र बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां आती हैं। चंबल में तो घड़ियाल, मगरमच्छ, गांगेय डाल्फिन पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं।
हैंडीक्राप्टसे सालाना 15 सौ करोड का निर्यात
हैंडीक्राफ्ट सर्किट में आगरा के मार्बल इनले वर्क व जरदौजी को शामिल हैं। आगरा का पच्चीकारी का काम दुनियाभर में प्रसिद्ध है। पर्यटक मार्बल के बने ताजमहल के मॉडल या अन्य सजावटी सामान ले जाना पसंद करते हैं। जरदौजी के पैनल लोगों की घरों की शोभा बढ़ाते हैं। आगरा से प्रतिवर्ष करीब 1500 करोड़ रुपये का हैंडीक्राफ्ट निर्यात होता है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भी दिया भरोसा
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ठा.जयवीर सिंह ने आगरा में छह नवंबर-2022 को सूरसदन में हुए एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करते हुए ताजमहल परिसर दुकानदारों के लिए राहत की बात कही थी।