आगरालीक्स…आगरा में इस साल चला था सबसे बड़ा रेस्क्यू आपरेशन. उटंगन नदी में डूबकर 12 युवकों की हुई थी मौत. 125 घंटे में मिले थे सभी के शव…पढ़े आगरा में इस साल की सबसे दर्दनाक खबर
आगरा के लिए साल 2025 न भूलने वाला साल है. इस साल की सबसे बड़ी घटना अक्टूबर में हुई थी, जब मूर्ति विसर्जन के दौरान उटंगन नदी में एक के बाद एक 13 युवक डूब गए थे. एक युवक तो उसी समय किसी तरह बाहर निकल आया था लेकिन बाकी के सभी 12 युवकों की मौत हो गई थी. प्रशासन ने अपनी पूरी कोशिश लगाकर नदी में डूबे सभी 12 लोगों की तलाश की लेकिन इसके लिए उसे सबसे बड़ा रेस्क्यू आपरेशन चलाना पड़ा. घटना के करीब 125 घंटे यानी पांच दिन तक नदी में युवकों की तलाश पूरी हुई. प्रशासन ने इस रेसक्यू को आपरेशन उटंगन नाम दिया था. डीएम ने खुद कहा कि उनके द्वारा चलाया गया यह अभी तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू आपरेशन था.
ये थी पूरी घटना
जनपद के तहसील खेरागढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुसियापुर/डूंगरवाला गाँव के पास ऊंटगन नदी में दशहरा पर मूर्ति विसर्जन के दौरान 13 युवक डूब गए थे, जिनमें स्थानीय ग्रामीणों व स्थानीय पुलिस द्वारा तत्परता दिखाते हुए 01 युवक विष्णु को सकुशल बचा लिया गया था. इसके बाद तीन युवक ओमपाल, गगन व मनोज के शव बरामद कर लिए गये थे. लेकिन बाकी युवकों का कुछ पता नहीं चल रहा था. ऐसे में तत्काल एनडीआरएफ, एसडीआरएफ को घटना स्थल पर बुलाया गया, जिसमें 15 लोगों की एसडीआरएफ की टीम इटावा से तथा 17 लोगों की टीम एनडीआरएफ व 27 लोगों की पीएसी बल की टीम घटना स्थल पर लगाई गई, अपेक्षित सफलता न मिलने पर “ऑपरेशन उटंगन“ में सेना की 411वीं पैराफील्ड कम्पनी के 19 लोगों की स्पेशलिस्ट टीम को भी मौके पर बुलाया गया. तीन दिन बाद करन, ओकेश और वीनेश के शव मिले. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी की संयुक्त टीम की सहायता से दिन-रात निरंतर हर संभव प्रयास किए गये. इसके दो दिन बाद सचिन, दीपक और गजेंद्र के शव मिले. गाजियाबाद से एनडीआरएफ की 20 लोगों की टीम को ऑपरेशन में शामिल किया गया, जिसमें स्कूवा डाइव, गोताखोर स्पेशलिस्ट शामिल थे. बाद में अभिषेक और भगवती के भी शव मिले. 125 घंटे में इस आपरेशन में अंतिम शव हरेश का मिला.
डीएम ने “ऑपरेशन उटंगन“ के सम्बन्ध में कहा कि
“यह मेरे जीवन का सबसे कठिन और भावनात्मक बचाव अभियान था”, यह अभियान प्रशासनिक दृढ़ संकल्प, तकनीकी विशेषज्ञता और मानवीय संवेदना का उदाहरण है। “ऑपरेशन उटंगन“ में नदी की गहराई, तेज बहाव और मिट्टी की परतें ऑपरेशन को बेहद जटिल बना रही थीं, कई असफल प्रयासों के बाद “ऑपरेशन उटांगन“ को एक रणनीतिक युद्ध की तरह चलाया गया, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता को भी जोड़ा गया। साथ ही पड़ोसी जनपद भरतपुर, करौली और धौलपुर के ज़िलाधिकारियों से तत्काल संपर्क कर नदी में पानी न छोड़ने पर रोक लगवाई गई। साथ ही सिंचाई विभाग, पंचायतराज विभाग, नगर विकास तथा अन्य विभागों के साथ स्थानीय ग्रामीणों की मदद से जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए एक अस्थायी मिट्टी का तटबंध बनाया गया, जिससे जल स्तर में कमी आई।