आगरालीक्स ..आगरा में अधिकारियों के कारण कोरोना बेकाबू हुआ है, शासन से आई टीम की रिपोर्ट ने कोरोना मरीजों के इलाज, जांच और इसमें जुटी टीम की लापरवाही की परतें खोल दी हैं। इसे काबू करने के लिए शासन स्तर से टीम भेजी जा रही है।
आगरा में दो मार्च को इटली से लौटे खंदारी निवासी जूता कारोबारी के दो बेटे, तीन परिजन और उसके बाद फैक्ट्री मैनेजर में कोरोना की पुष्टि हुई थी। मार्च के अंत तक 12 केस आए, ये सभी विदेश से लौटने वाले थे। अप्रैल में जमातियों के सामने आने के बाद हालात बेकाबू होते गए, इन्हें कंट्रोल नहीं किया जा सका। कोरोना का संक्रमण बस्तियों के साथ ही एसएन मेडिकल कॉलेज में फैल गया, जूनियर डॉक्टर, वार्ड ब्वॉय भी संक्रमित हो गए।
टीम ने दी रिपोर्ट
शासन से केजीएमयू के डॉ सूर्यकांत और डॉ विवेक कुमार को आगरा भेजा गया था, टीम ने 18 अप्रैल को जांच की, अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें सामने आया है कि एसएन प्रशासन ने बडी लापरवाही की, प्राचार्य डॉ जीके अनेजा छुटटी पर चले गए, जिन्हें कार्यवाहक प्राचार्य बनाया वे क्वारंटाइन हो गए, एक और को प्राचार्य बनाया उन्होंने अस्थमा की समस्या होने के कारण असमर्थता जता दी। इससे इतर एसएन मेडिकल कॉलेज में पहले दिन से ही कोरोना की जांच शुरू हो सकती थी लेकिन लैब को अपग्रेड नहीं किया गया, इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई दिया। कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया। पैसिव और एक्टिव क्वारंटाइन में कोई अंतर नहीं समझा गया, आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ की गाइड लाइन से काम नहीं किया गया।
एक निलंबित और एक पर विभागीय कार्रवाई
18 अप्रैल को लापरवाही के लिए मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पीके माहेश्वरी को निलंबित और डॉ राजेश्वर दयाल पर विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है। इस मामले में अभी और भी कार्रवाई हो सकती है।