
दिसंबर 2015 में गोरखपुर विवि के कुलसचिव अशोक अरविंद को अंबेडकर विवि, आगरा का कुलसचिव बनाया था। छह महीने बाद ही उनका तबादला गोरखपुर विवि कर दिया गया है। इसे लेकर विवि में तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं, कहा जा रहा है कि कुलसचिव को विवि के फर्जीवाडे में फंसने का डर लग रहा था, इसलिए वे अपने कार्यालय में भी नहीं भेजते थे। उन्हें जिस काम के लिए कर्मचारियों की एक लॉबी लेकर आई थी, वह काम भी हो चुका था। कई कर्मचारियों के तबादले भी कुलसचिव अशोक अरविंद ने कर दिए थे। इसलिए उन्हें आगरा से जल्द से जल्द जाने की चिंता सता रही थी। इसे लेकर कर्मचारियों का एक ग्रुप सक्रिय था और रात ही रात कुलसचिव का तबादला कर दिया गया।
कुर्सी पर बैठ सकेंगे केएन सिंह
कुलसचिव अशोक अरविंद के आने से पहले परीक्षा नियंत्रक केएन सिंह कार्यवाहक कुलसचिव थे। कुलसचिव कार्यालय में वे ही बैठा करते थे, नए कुलसचिव के आते ही उन्होंने अपने कार्यालय से उन्हें हटा दिया। परीक्षा नियंत्रक को एक छोटे से कमरे में बैठना पडा। अब परीक्षा नियंत्रक पुराने कमरे में ही बैठ सकेंगे।
छात्र संघ अध्यक्ष ने कुलपति के सामने रखी मांगे
विवि के छात्र संघ अध्यक्ष क्रष्ण मणि त्रिपाठी ने आवासीय संस्थानों में कैंटीन सहित अन्य मांगों को लेकर कुलपति से मुलाकात की, उन्होंने जल्द मांग पूरी करने का आश्वासन दिया है। इससे पहले भी छात्र संघ अध्यक्ष के नेत्रत्व में छात्रों ने कुलपति आवास का घेराव किया था और अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन किया था। छात्र आवासीय संस्थानों में मूलभूत सुविधाएं और परीक्षाफल घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
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