
छोटे गांव से एसपी सिटी तक का सफर
मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी विधुना कोतवाली क्षेत्र के गांव मानिकोठी के रहने वाले थे, उनके पिता श्रीचंद दुबे रिटायर बीडीओ हैं। वे पत्नी और दो बेटों के साथ रह रहे थे, उनका छोटा बेटा आयुष दस साल का है और बडा बेटा नौंवी का छात्र है। उनके अंकल एचसी दुबे पुलिस अधिकारी रह चुके हैं, जबकि भाई दुबई की फर्म में सीईओ हैं। मथुरा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के व्यवहार और उनकी सहयोग करने की कार्यशैली से हर कोई प्रभावित था, लोगों का यहां तक कहना है कि वे पुलिस महकमे में रहते हुए इतने सज्जन थे, यह बडी बात है।
आगरा में रहता है एसओ का परिवार
एसएचओ और फरह थाना प्रभारी संतोष कुमार का परिवार आगरा कैंट पर रहता है, वे आगरा के पर्यटन थाने के पहले प्रभारी थी। हंसमुख होने के साथ ही उनकी कार्यशैली की आगरावासी तारीफ करते हैं। मथुरा में भी लोग उनसे प्रभावित थे। उनका बेटा एक मिशनरी स्कूल में पढ रहा है।
21 की मौत
आगरा रीजन में जवाहर बाग में सत्याग्रहियों के गुरिल्ला हमले में एसपी सिटी और एसओ शहीद हो गए, मीडिया ने 21 कथित सत्याग्रहियों की मौत की रिपोर्ट दी है, जवाहर बाग और हॉस्पिटल में शव पडे हुए हैं, पुलिस फोर्स रात भर सत्याग्रहियों की धरपकड में लगा रहा।
जवाहर बाग में पेड पर बैठे सत्याग्रहियों ने पुलिस पर सीधे फायरिंग और बमबारी कर दी, इसमें मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और आगरा पर्यटन थाने के प्रभारी रह चुके सब इंस्पेक्टर संतोष कुमार शहीद हो गए हैं। डीएम मथुरा भी घायल हुए हैं। इसमें कई पुलिस कर्मी और सत्याग्रही गंभीर रूप से घायल हैं, इनका इलाज चल रहा है, कई की मौत होने की खबर है, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। सत्याग्रहियों को फरह के एक कॉलेज में अस्थायी जेल बनाकर रखा गया है।
यह है जवाहर बाग प्रकरण
एक जनवरी, 2014 को कथित सत्याग्रहियों ने मथुरा स्थित जवाहर बाग में डेरा डाला था। करीब एक हजार लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे थे। वे मध्य प्रदेश के सागर से दिल्ली जंतर-मंतर पर पहुंचने के लिए चले थे। यहां डेरा जमाने के बाद इन लोगों का जवाहर बाग में स्थापित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से विवाद होने लगा। उन्होंने आम, आंवला, बेर सहित अनेक बाग उजाड़ दिए। ठेकेदार के साथ मारपीट की। प्रशासनिक अफसरों ने इस समस्या को सुलझाने कोशिश की तो खुद को सत्याग्रही बताने वालों ने इन पर हमला कर दिया। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह से अपनी जान बचाई थी। ऐसे कई मामलों में 12 से अधिक रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। अब इनकी संख्या तीन हजार के करीब बताई जाती है।
नेता रामवृक्ष यादव
कथित सत्याग्रहियों का नेतृत्व रामवृक्ष यादव नाम का व्यक्ति कर रहा है। यह उनके साथ ही मध्यप्रदेश के सागर से दिल्ली के लिए चला था। इसके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। हां, जब भी प्रशासन से कथित सत्याग्रहियों का टकराव हुआ, रामवृक्ष यादव की ओर से ही बयान जारी किए गए।
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