आगरालीक्स…आगरा के बल्केश्वर महादेव मंदिर में शुरू हुई श्रीराम कथा. राजन जी महाराज ने बताया कथा का महत्व. जयघोषों के साथ निकली कलश यात्रा
पीत वस्त्र पहने महिलाएं, सिर पर कलश लिए भगवान श्रीराम के जयघोष बोलती हुई चल रही थीं। सभी में अत्यंत उत्साह और भगवान के प्रति अनूठी श्रद्धा थी। ऱथयात्रा में विराजमान संत राजन जी महाराज के दर्शन करके सभी आत्म सुख की अनुभूति कर रहे थे। बल्केश्वर महादेव मंदिर पर गुरुवार से पांच दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन श्री बल्केश्वरनाथ महादेव भक्त मंडल द्वारा किया जा गया है। उसकी भव्य कलश यात्रा सैकड़ों महिलाओं के साथ कमला नगर में साईं मंदिर के सामने नीरज व गौरव अग्रवाल गोटे वालों के निवास से प्रारंभ हुई। जहां मंदिर के महंत सुनील कांत नागर व महंत कपिल नागर ने महाराज श्री का स्वागत किया और कलश यात्रा की शुरुआत की। उसके बाद बैंड बाजों के साथ यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई बल्केश्वर महादेव मंदिर पहुंची। रास्ते में इसका जगह-जगह स्वागत किया गया। मंदिर पर पहुंच कर सभी महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक कलश स्थापित किए और प्रसाद ग्रहण किया। इस कलश यात्रा में 1100 महिलाये शामिल हुई।

श्री राम कथा के पहले दिन राजन जी महाराज ने शिव –पार्वती विवाह की कथा श्रवण कराई। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने कई वर्षों तक शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या की। जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवताओं, भूत, प्रेत, अनेक रूप बनाकर हिमांचल के नगर की तरफ शोर गुल मचाते हुए चल दिए। बारात में राजा हिमाचल के नगर में पहुंची तो लोग भागने लगे। रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर गई। भंयकर भेष में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगे। मैनावती माता पार्वती को गोद में लेकर विलाप करने लगीं। वे कहती हैं कि शंकरजी के साथ मैं अपनी बेटी का विवाह नहीं करूंगी चाहे जो भी हो जाए। नारद जी आये और उन्होंने मैनावती को बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहे हैं, वे शक्ति स्वरूपा हैं।
राजन जी ने कहा कि विदा के दौरान मैना रानी ने पार्वती जी समझाया कि हमेशा अपने पति की सेवा करना। पति धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है। मुख्य यजमान श्रीमती विनीता गुप्ता सुगंधी और महेश चंद गौरी शंकर अग्रवाल थे। वीरेंद्र कुमार, सुरेश चंद सिंघल, अशोक खंडेलवाल, श्याम सुंदर माहेश्वरी, हरिशंकर खंडेलवाल आदि मौजूद रहे।
