आगरालीक्स…गंगा दशहरा कल मनाया जाएगा। इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान, ध्यान, दान करने से नष्ट होते हैं पाप। दस की संख्या और दशहरा का महत्व।
ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी कल

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी पर जाकर स्नान, ध्यान तथा दान करना चाहिए। इससे वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है।
आगरा में यमुना नदी तो नलों में गंगाजल
आगरा के लोग भाग्यशाली हैं कि उनके यहां यमुना नदी है हालांकि अब वह पहले जैसी नहीं रही, जिससे सभी जगह स्नान किया जा सके लेकिन फिर भी एक सौगात और है कि आगरा के बहुत से क्षेत्रों के नलों में गंगा का पानी आता है। यदि कोई मनुष्य नदी तक नहीं जा पाता तब वह अपने घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।

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दान और स्नान का सबसे ज्यादा महत्व
🔶 ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को संवत्सर का मुख कहा गया है. इसलिए इस इस दिन दान और स्नान का ही अत्यधिक महत्व है. वराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, बुधवार के दिन, हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थी. इस पवित्र नदी में स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते है
गंगा दशहरा का महत्व
🔷 भगीरथी की तपस्या के बाद जब गंगा माता धरती पर आती हैं उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी थी। गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना जाने लगा।
दस वस्तुओं का करना चाहिए दान
🔶 गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालु जन जिस भी वस्तु का दान करें उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए. ऎसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है
🌻गंगा दशहरे का फल
🔷 ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है. इन दस पापों में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं. इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है
🔥पूजा विधि
🔶इस दिन स्नान के बाद मंत्र का पाठ किया जाना चाहिए। किया जाता है. यदि कोई मनुष्य वहाँ तक जाने
🍁ऊँ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:
🔷इस मंत्र के बाद “ऊँ नमो भगवते ऎं ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा” मंत्र का पाँच पुष्प अर्पित करते हुए गंगा को धरती पर लाने भगीरथी का नाम मंत्र से पूजन करना चाहिए। इसके साथ ही गंगा के उत्पत्ति स्थल को भी स्मरण करना चाहिए।
गंगा जी की पूजा में सभी वस्तुएँ दस प्रकार की होनी चाहिए. जैसे दस प्रकार के फूल, दस गंध, दस दीपक, दस प्रकार का नैवेद्य, दस पान के पत्ते, दस प्रकार के फल होने चाहिए