आगरालीक्स… आगरा में गोलगप्पों का ठेल-ढकेल पर ही रोजाना लाखों का कारोबार। हर ढकेल व दुकान काजायका अलग। सिर्फ पानी का खेल।ब्रांडेड कंपनियां भी मैदान में। आपका कौन फेवरेट…
पानीपूरी, टिकिया और पानी के बताशे जैसे नाम भी
गोलगप्पे के शौकीनों की पूरे देश में कहीं कोई कमी नहीं है। हर शहर और राज्य में इसके पानीपूरी, गोलगप्पे, टिकिया, पानी के बताशे आदि नामों से पुकारा जाता है और बड़े शौक से खाया जाता है।
शाम को हर चौराहे और गली के मोड़ पर गोलगप्पे
आगरा में भी बेढ़ई-कचौड़ी के साथ गोलगप्पे का बड़ा कारोबार है। आगरा में हर चौराहे और गली पर शाम होते ही गोलगप्पों की ढकेल लगी हुई मिल जाएंगी, जिन पर लोगों की भीड़ लगी मिल जाएगी।
इधर से गुजरे तो हो जाएं एक-दो गोलगप्पे
आगरा में कुछ दुकान और ढकेल ऐसी हैं, जहां से गुजरने के बाद कुछ नहीं तो कम से कम दो-चार गोलगप्पे खाकर लोग गुजरते हैं।
राजा की मंडी में महिलाओं की लगती है भीड़
इसमे राजा मंडी में भारत टाकीज के मोड़ पर लगने वाली ढकेल, सूरज चाटवाले के गोलगप्पे के साथ रामस्वरूप भल्ले वाले की दुकान के साथ सबसे ज्यादा फेमस यहां लगने वाली बांके की ढकेल।
राजामंडी में बांके की ढकेल करीब 50 साल से
बांके की ढकेल करीब 50 साल से राजा मंडी के अलग-अलग स्थानों पर लगती रही है। बांके के गोल गोलगप्पे के लोग दीवाने हैं। बांके अब ढकेल पर तो नहीं खड़े होते बस कभी-कभी आकर आसपास खड़े हो जाते हैं या कहीं बैठ जाते हैं। ढकेल पर बेटे रहते हैं।
देहली गेट पर लक्ष्मन के गोलगप्पे
देहली गेट पर लक्ष्मन टिकिया वाल फेमस रहा है। बर्षों तक देहली गेट पुलिस चौकी के पास (पहले चौकी नहीं थी) पर ढकेल खड़ी होती थी लेकिन अब देहली गेट पर दुकान है, जहां अब भी सुबह नाश्ता और शाम को गोलगप्पे बिकते हैं।
शीतला गली के गोलगप्पे भी खासे फेमस

शीतला गली में दो दुकानों पर सस्ती और अच्छे पानी के लिए एक ही परिवार की दो दुकानवालों ने गोलगप्पे बेचकर ही खासी पहचान हासिल की है। यह परिवार टिकियावालों के नाम से ही फेमस हो गया है। सेंट जोंस चौराहा, चौपाटी के साथ अन्य स्थानों के दुकानदारों के गोलगप्पे भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
पानी का स्वाद बनाता है गोलगप्पों को खास
खास बात यह है कि गोलगप्पों का पानी का स्वाद कैसा है, वही उस दुकान की खास पहचान होता है। पानी का स्वाद अच्छा नहीं होने पर एक-दो गोलगप्पे खाकर ही लोग हाथ खड़े कर देते हैं। दुकानदार पानी भी कई प्रकार का रखते हैं, कम मिर्च का, तीखी मिर्च का, खट्टा, ज्यादा खट्टा सभी प्रकार का पानी होता है।
बड़े होटल और रेस्टोरेंटों में भी गोलगप्पों का जलवा
गोलगप्पे ढकेल और छोटी दुकानों के अलावा बड़ी दुकानों और होटलों में अपनी अलग पहचान रखते हैं। यहां बेहतर क्वालिटी के साथ साफ-सफाई का भी ज्यादा ख्याल रखा जाता है और टेस्ट के मामले में भी किसी से कम नहीं होते हैं लेकिन फिर भी यहां गोलगप्पे खाने के लिए ढकेलों की तरह लाइन नहीं लगती है।
महिलाओं की खास पसंद
गोलगप्पे खाने के शौकीनों में लड़कियों और महिलाओँ की संख्या ज्यादा ज्यादा होती है। गोलगप्पों की ढकेलों पर गोलगप्पे के साथ भल्ला (आलू की टिक्की), दहीबड़ा भी रखा जाता है, जो लोगों की पसंद होता है।
गोलगप्पों की बिक्री में ब्रांडेड कंपनियां भी
गोलगप्पे के बड़े कारोबार को देखते हुए हल्दीराम के बने बनाए गोलगप्पों और मसाले के पाउच का पैकट आता है। चायनीज गोलगप्पे भी खूब बिक रहे हैं। कई स्थानों पक कच्ची लोई रखी होती हैं, घर जाकर सेंकने के बा तैयार हो जाती है और घर में पानी बनाकर इन्हें खाया जाता है।
माईथान के घरों में बड़े पैमाने पर बनते हैं गोलगप्पे
माईथान के कई घरों में सुबह से घरों में कढ़ाई चढ़ जाती है और थोक के हिसाब से गोलगप्पे बनाकर ढकेल वालों के साथ दुकानदारों को बेचे जाते हैं, जो अपने यहां ले जाकर बेचते हैं।