आागरालीक्स…आगरा में शुरू हुआ पहला हरित श्मशानघाट. लकड़ी के स्थान पर गौकाष्ठ का होगा उपयोग. पर्यावरण को बचाने को हवा में फिल्टर होकर जाएगा धुआं…
वन संरक्षण एवं पर्यावरण प्रदूषण कम करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए नगर निगम ने कबीर घाट फाउंड्रीनगर में जिले के पहले हरित शवदाह गृह का निर्माण कराया है। शुक्रवार को महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने इसे आमजन को सौंप दिया और शहरवासियों से पर्यावरण हितैषी बनने की अपील की। इस संबंध में जानकारी देते हुए अपर नगर आयुक्त सुरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि कबीरघाट पर वर्तमान में लकड़ी से संचालित पारंपरिक शवदाहगृह का उपयोग लोगों द्वारा किया जा रहा है। यहीं पर अब नगर निगम ने इस हरित शवदाह गृह का निर्माण कराया है। अब हरित शवदाह गृह से भी यहां पर दाह संस्कार किया जा सकेगा। इससे जहां पेड़ पौधों का संरक्षण हो सकेगा वहीं वायु प्रदूषण भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

नाले नालियों में बहने वाले गोबर का उपयोग भी हो सकेगा। इस शवदाह गृह पर लकड़ियों के स्थान पर गोकाष्ट का उपयोग किया जाएगा। पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीन रिव्ल्यूशन नाम की दिल्ली की संस्था को इसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। अस्सी से एक कुंतल गोकाष्ठ से ही व्यक्ति का यहां पर अंतिम संस्कार हो जाएगा, जबकि पारंपरिक तरीके से होने वाले दाह संस्कार में तीन से चार कुंतल लकड़ी का उपयोग हो जाता है। कबीर घाट पर दाह संस्कार के लिए यहां पर दो भट्ठियां और धुआं निकासी के लिए चिमनियां लगाई गयी हैं जिनसे धुआं फिल्टर होकर जाएगा।
इसके अतिरिक्त कबीर घाट पर शव को स्नान करने, शव को रखने की सुविधा उपलब्ध है। दाह संस्कार के बाद कबीर घाट पर अस्थियों को सुरक्षित परिजनों को सौंपने की भी व्यवस्था उपलब्ध है। इस अवसर पार्षद शेराभाई, बनवारी लाल और नगर निगम से जोनल अधिकारी विजय कुमार, जोनल सैनेट्री अधिकारी इंद्रजीत मौजूद रहे।