आगरालीक्स… आगरा, मथुरा सहित यमुना में पांच से छह मीटर गहराई तक गंदगी जमी हुई है। नाले यमुना में गिर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जल निगम के प्रबंध निदेशक को किया तलब…. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उन्हें 25 नवंबर 2024 के आदेश का पालन न करने और यमुना नदी से गाद, कीचड़ और कचरा हटाने के संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए किया गया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं उज्जवल भुआन की बेंच द्वारा पारित किया गया।
कोर्ट ने 25 नवंबर 2024 के आदेश और जल निगम के 22 जनवरी 2025 को दायर शपथपत्र की समीक्षा के बाद पाया कि आदेश का पालन नहीं किया गया है। न्यायालय ने कहा कि उसके समक्ष यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि यमुना नदी में 5 से 6 मीटर गहराई तक गाद, कीचड़ और कचरे का जमाव हो चुका है। आईआईटी-रुड़की की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद कोर्ट ने पूर्व में निर्देश जारी किए थे।
इसको देखते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवेदन पत्र दिनांक 18 मार्च 2025 को विचार के लिए सूचीबद्ध किए जाएं और जल निगम के प्रबंध निदेशक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने को कहा। साथ ही, अगले सुनवाई से पहले प्रबंध निदेशक को एक व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें 25 नवंबर 2024 के आदेश के अनुपालन का विवरण होगा। यदि जल निगम को किसी अन्य प्राधिकरण की सहायता की आवश्यकता हो, तो वह इसके लिए उचित अंतरिम आवेदन दाखिल कर सकता है। जब न्यायालय के समक्ष यह बात उठायी गयी कि जल निगम ने आंशिक रूप से टेप्ड और अनटेप्ड नालों को बंद करने की कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की है, इस पर न्यायालय ने कहा कि किसी कारण से जल निगम के सर्वोच्च अधिकारी को तलब किया गया है।
25 नवंबर 2024 को क्या दिया था आदेशः
38 अनटेप्ड और 5 आंशिक रूप से टेप्ड नालों को तुरंत टेप करने के अंतरिम उपाय किए जाएं और इसका अनुपालन रिपोर्ट एक महीने के भीतर प्रस्तुत की जाए। सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया गया कि वे इस कार्य के लिए तत्काल आवश्यक स्वीकृतियां जारी करें। 61 अनटेप्ड और 6 आंशिक रूप से टेप्ड नालों को प्रबंधित करने हेतु अंतिम उपायों के संबंध में, आदेश के पैरा 13 में उल्लिखित समय सीमा में काम पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। जल निगम को 17 जनवरी 2025 तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करना था, जिसे 24 जनवरी 2025 को विचार किया जाना था।
जल निगम द्वारा 22 जनवरी 2025 को दायर हलफनामे में कहा गयाः
जल निगम ने कहा कि 11 नवंबर 2024 के आदेश का पालन करते हुए, ₹136 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नमामि गंगे योजना के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (नेशनल क्लीन गंगा मिशन) को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गई है। यह रिपोर्ट आईआईटी-रुड़की को मूल्यांकन के लिए भेजी गई है।
आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट
वरिष्ठ अधिवक्ता किशन चंद जैन, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी की, ने कहा कि आईआईटी-रुड़की की सितंबर 2024 की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि यमुना नदी के तल में जमा कचरा और गाद का मुख्य कारण शहर के विभिन्न हिस्सों से अनुपचारित गंदे पानी का यमुना में जाना है। जब तक सभी अनटेप्ड व आंशिक रूप से टेप्ड नालों का गन्दा पानी यमुना में जाना बन्द नहंी होता है, यमुना को प्रदूषण से मुक्त करना असंभव है। इसके अलावा, जब तक ये नाले पूरी तरह से बंद नहीं होते और गंदे पानी को उपचार के लिए मोड़ा नहीं जाता, तब तक यमुना में बैराज निर्माण संभव नहीं हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे की निगरानी कर रहा है, इसलिए विभिन्न स्वीकृतियां और मंजूरी समयबद्ध तरीके से प्राप्त होने की उम्मीद की जा सकती है। यदि प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाए, तो निकट भविष्य में यमुना को गंदगी और कचरे से मुक्त किया जा सकता है।”
पूरन डावर, अध्यक्ष, आगरा डवलपमेन्ट फाउंडेशन (एडीएफ), जो इस मामले के आवेदक हैं, ने आशावाद व्यक्त किया कि यमुना की सफाई न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से आवश्यक है बल्कि इसका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। ऐतिहासिक रूप से, यह नदी परिवहन और आजीविका का एक प्रमुख स्रोत रही है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जारी रहने से, हमें यमुना के बहुप्रतीक्षित पुनरुद्धार की उम्मीद करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के चलते अब सभी की नजरें जल निगम पर टिकी हैं कि वह अगली सुनवाई से पहले आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित करता है या नहीं। यदि इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।