आगरालीक्स…आगरा के पनवारी कांड में दोषियों को मिली 5—5 साल की सजा. विधायक चौधरी बाबूलाल जेल में जाकर सभी से मिले. बोले—मजबूत पैरवी की जाएगी, फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में करेंगे अपील…
आगरा के बहुचर्चित 34 साल पुराने पनवारी कांड में कोर्ट ने बुधवार को 35 आरोपियों को दोषी करार दिया. शुक्रवार को कोर्ट ने सभी दोषियों को 5—5 साल की सजा का आदेश दिया जिसके तहत 32 को जेल भेज दिया गया और तीन दोषियों को कोर्ट में हाजिर न होने पर गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं. इस मामले में 15 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया तो वहीं मुकदमा विचरण के दौरान 22 की मृत्यु हो गई थी. शुक्रवार को यह सजा सुनाई गई. दोषियों को पांच साल का कठोरवास और हर एक पर 41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.विधायक बाबूलाल बोले—मजबूत पैरवी की जाएगी
आगरा की विधानसभा फतेहपुर सीकरी से विधायक चौधरी बाबूलाल द्वारा बताया गया कि पनवारी कांड में 28 मई को आये फैसले में अकोला के 32 लोगों को सजा सुनाई गई है. इस संबंध में विधायक चौधरी बाबूलाल द्वारा बताया गया कि वह 27 मई से 29 मई तक तिरुपति अपने परिवार के साथ गए हुए थे. वहां से लौटने के बाद यह जानकारी हुई है. उन्होंने आकर जेल में बंद सभी लोगों से मुलाकात की मुलाकात करके सभी लोगों को आश्वस्त किया कि आपके केस की मजबूत पैरवी की जायेगी और जमानत कराकरा शीघ्र ही जेल से निकाला जायेगा.
विधायक बाबूलाल ने कहा कि जजमेन्ट से पहले मुझे कोई जानकारी नहीं थी और न ही मुझे कोई जानकारी उपलब्ध करायी गयी थी. माननीय न्यायालय के फैसले का हम सम्मान करते हैं, लेकिन विधिक परामर्श करने के उपरान्त माननीय न्यायालय के फैसले के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय में अपील की जायेगी और समाज हित में अपील का खर्चा मेरे द्वारा ही वहन किया जायेगा, अपील के लिये श्रेष्ठ अधिवक्ताओं का एक पैनल बनाकर मजबूती के साथ अपील को माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष अच्छे से प्रस्तुत किया जायेगा. जिससे सभी लोगों को न्याय मिल सके. उन्होंने कहा कि मैं समाज के लिये हमेशा समर्पित रहा हूँ और इस संकट के समय में भी समाज के साथ हूँ व आगे भविष्य में भी समाज के हित में सदैव समर्पित रहूँगा और समाज का जो भी निर्णय होगा वह सिरोधार होगा.
ये था पूरा मामला
सिकंदरा के गांव पनवारी में 21 जून 1990 को जाटव समाज की बारात चढ़ाने को लेकर जाट समाज से विवाद हो गया था, अगले दिन 22 जून को पुलिस की मौजूदगी में बारात चढ़ाए जाने पर विवाद के बाद बवाल हो गया था। फायरिंग में गोली लगने से सोनी राम जाट की मौत हो गई थी। इसके बाद आस पास के गांवों में हिंसा भड़क गई थी, 24 जून 1990 को अकोला में दोपहर एक बजे अनुसूचित जाति अ ौर जाट समाज के लोग आमने सामने आ गए थे, डेढ़ घंटे तक चलते संघर्ष में एक महिला की मौत हो गई थी और 150 से अधिक घायल हो गए थे। विवेचना के बाद 72 लोग आरोपी बनाए गए थे। बुधवार को एससी एसटी कोर्ट ने 35 आरोपियों को दोषी करार दिया गया।