आगरालीक्स ….कार्डियक अरेस्ट की पहचान कैसे करें, कैसे मरीज की जान बचाएं। ( Agra News: BLS & ALS training of Junior doctors in SNMC Agra#Agra)
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में बीएलएस और एएलएस का प्रशिक्षण दिया गया।
इस बीएलएस-एसीएलएस प्रमाणन के लिए यूपीएमसीआई द्वारा 6 क्रेडिट आवर्स भी स्वीकृत किए गए हैं। बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) दोनों ही जीवन रक्षक तकनीकें हैं जो आपातकालीन स्थितियों में उपयोग की जाती हैं। इसलिए इसकी जानकारी होना बहुत आवश्यक है ।कार्यक्रम में उप प्राचार्य डॉ टी पी सिंह भी उपस्थित रहे।
बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS)
BLS में वे तकनीकें शामिल हैं जो किसी व्यक्ति की जान बचाने में मदद कर सकती हैं जब उनकी सांस या दिल बंद हो जाए। इसमें शामिल हैं:
- कार्डियक अरेस्ट की पहचान: दिल के दौरे के लक्षणों की पहचान करना।
- सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन): छाती के दबाव और सांस देने की प्रक्रिया।
- स्वचालित बाहरी डिफिब्रिलेटर (AED) का उपयोग: हृदय को सामान्य गति में लाने के लिए विद्युत झटका देने वाला उपकरण।
एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS)
ALS में BLS की तकनीकों के अलावा और भी उन्नत जीवन रक्षक प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसमें शामिल हैं:
- एडवांस्ड एयरवे मैनेजमेंट: श्वासनली में ट्यूब डालकर सांस की नली को सुरक्षित करना।
- इंट्रावेनस दवाएं: नसों में दवाएं देना जो हृदय और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के कार्य को समर्थन देती हैं।
- कार्डियक रिदम मॉनिटरिंग और मैनेजमेंट: हृदय की लय की निगरानी करना और आवश्यकतानुसार उपचार करना।