मथुरालीक्स…बांकेबिहारी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गोस्वामी पक्ष को फटकार. कहा—गेम खेलने की कोशिश मत करो, बार—बार एक ही मुद्दा उठाने पर दी चेतावनी
वृंदावन में प्रस्तावित बांकेबिहारी कॉरिडोर को लेकर मंदिर की देखरेख करने वाले गोस्वामियों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गोस्वामी पक्ष को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी भी दी है. दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि बार—बार एक ही मुद्दे को उठाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं, आप गेम खेलने की कोशिश मत करो ओर चालें बंद कीजिए. बार बार मुद्छा उठाकर अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं. भविष्य में ऐसा होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी.बांकेबिहारी कॉरिडोर के विरोध में दायर की थी याचिका
यह मामला वृन्दावन स्थित प्रसिद्ध बाँके विहारी मंदिर कॉरिडोर को लेकर है. गोस्वामी परिवार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच अधिकार एवं प्रबंधन को लेकर वर्षां से विवाद चल रहा है. 27 जुलाई को गोस्वामियों ने मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मंदिर प्रबंधन के सरकारी अध्यादेश के विरूद्ध याचिका दायर की थी. गौरतलब है कि इस समिति का गठन कुछ दिन पहले ही हुआ था.
कोर्ट ने लगाई फटकार
बुधवार को तीन सदस्यीय पीठ मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, सतीश चंद्र शर्मा एव के विनोद चंद्रन ने मामले की सुनवाई की. इसी बीच गोस्वामी पक्ष के वकील संकल्प गोस्वामी ने मंदिर फंड के इस्तेमाल, वृंदावन कॉरिडोर और मंदिर न्यास बनाने के मुद्दे को फिर से उठाने की कोशिश की. इस पर पीठ ने सख्त लहजे में डांते हुए कहा कि कल ही आपने यह मामला न्यायमूर्ति सतीशचंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ के सामने उठाया था. पीठ ने गोस्वामी पक्ष के अधिवक्ताओं को स्पष्ट चेतावनी दी कि एक ही मुद्दे को बार-बार उठाना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और भविष्य में ऐसा होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी. प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पहवा और के. नटराजन ने यह स्पष्ट किया कि गोस्वामी पक्ष पहले ही मामले को दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने की कोशिश कर चुका है, जबकि मामला पहले से ही न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में सूचीबद्ध था.
पीठ ने स्पष्ट असहमति जताते हुए कहा कि एक ही विषय को बार-बार उठाना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है. पीठ ने कहा कि इस तरह की पुनरावृत्ति अनुचित है और इसे रोका जाना चाहिए. कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा कि आप ऐसा नही कर सकते हैं. आप इस तरह के खेल खेलना व चाले बंद कीजिए. पीठ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न हुई और जानबूझकर मामला किसी अन्य पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया, तो संबंधित वकील के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही पर विचार किया जा सकता है.
एक ही पीठ सुनेगी मंदिर के सभी मामले
न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के बांके बिहाीर मंदिर प्रबंधन अध्यादेश से उत्पन्न सभी मामलों को मिलाकर अब एक ही पीठ के सामने रखा जाएगा जिससे सुनवाई में स्पष्टता और एकरूपता बनी रहे.