आगरालीक्स…आगरा में सोमवार को 2526 अज्ञात मृतकों की अस्थियों के साथ निकलेगा मुक्ति रथ. सोरों स्थित गंगाजी में कराई जाएंगी ये अस्थियां प्रवाहित. श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी की यूँ शुरू हुई ‘नाले’ से ‘चिता’ तक की यात्रा…
एक समय था जब अज्ञात और असहाय मृतकों की लावारिस लाशों का कोई धनाधोरी नहीं था। पुलिस के पास भी उनके दाह संस्कार के लिए कोई उचित व्यवस्था व साधन नहीं थे तो वह लाशों को नाले में फेंक दिया करती थी, लेकिन श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी की पहल से यह अमानवीय कृत्य अब नहीं होता.. अब तो विधि विधान से मृतक के दाह संस्कार के बाद उनके अस्थि फूल भी सँभाल कर रखे जाते हैं। परिजन आते हैं तो उन्हें वे फूल दे दिए जाते हैं अन्यथा हर तीन वर्ष बाद अस्थि विसर्जन यात्रा निकालकर उन अस्थियों को हड़ गंगा में प्रवाहित किया जाता है। यह सिलसिला अब नवम अस्थि विसर्जन यात्रा तक आ पहुँचा है। आज 25 अगस्त को मुक्ति रथ द्वारा 2526 मृतकों की अस्थियों को सोरों स्थित गंगा जी में प्रवाहित करने के लिए ले जाया जाएगा।यूँ शुरू हुई 'नाले' से 'चिता' तक की यात्रा
श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी और इस दाह संस्कार सेवा प्रकल्प से शुरू से ही जुड़े रहे आगरा और सूरत के प्रमुख समाजसेवी व श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी के संरक्षक अशोक गोयल ने बताया कि औषधालय प्रबंधक का दायित्व सफलतापूर्वक निभाने के बाद मुझे श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी में उपमंत्री का उत्तरदायित्व सँभालने का अवसर मिला। इस नयी भूमिका में रहते हुए एक दिन संस्था के कार्य से मुझे श्मशान घाट, ताजगंज जाने का अवसर मिला। वहाँ जो दृश्य देखा, उसने मन को गहरे तक झकझोर दिया। पुलिस के कुछ कांस्टेबल एक अज्ञात मृतक की लाश को श्मशान के एक कोने में स्थित नाले में फेंक रहे थे। मैं कुछ देर रुका और उनसे इस अमानवीय कृत्य का कारण पूछा। पुलिस कर्मियों ने जो उत्तर दिया, वह पीड़ा से भरा था। उन्होंने बताया कि जब भी कोई अज्ञात मृतक की लाश मिलती है, तो उस दिन कांस्टेबल अपने भाग्य को कोसता है। शासन या प्रशासन से उन्हें कोई सहायता नहीं मिलती। दाह संस्कार की लकड़ी की व्यवस्था करना, लाश को उचित रीति से अग्नि देना, सब कुछ उनके लिए एक भारी जिम्मेदारी और कठिन कार्य बन जाता है।
