आगरा/हौशंगाबाद। खतरनाक आॅनलाइन गेम ‘ब्लू व्हेल’ के टास्क को पूरा करने के लिए टीन एजर्स कुछ भी करने को तैयार हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला आगरा में सामने आया जहां दो 9वीं की छात्रायें घर से भागकर 700 किमी दूर मध्य प्रदेश के हौशंगाबाद पहुंच गईं। हालांकि हौशंगाबाद स्टेशन पर शक होने पर जीआरपी पुलिस ने दोनों से पूछताछ की, तो सच सामने आ गया। सूचना पर उनके पेरेंट्स भी आगरा से हौशंगाबाद पहुंच गए।
जीआरपी भोपाल की एसपी अनीता मालवीय ने बताया कि दोनों लड़कियां होशंगाबाद रेलवे स्टेशन पर संदेहास्पद नजर आईं तो जीआरपी के चौकी प्रभारी एसएन मिश्र ने दोनों से पूछताछ की। पता चला कि दोनों एक स्कूल में 9वीं की छात्रायें हैं। वे ब्लू व्हैल गेम का दूसरे स्टेज का टास्क पूरा करने के लिए घर से भागकर यहां तक पहुंच गईं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके स्कूल की कई लड़कियां इस गेम के टास्क पूरा करने में लगी हुई हैं। उन्हें इस गेम के बारे में स्कूल में ही खेलने वाली दूसरी लड़कियों से पता चला था।
जीआरपी होशंगाबाद के प्रभारी एसएन मिश्र ने बताया कि उनकी गश्ती टीम ने रात में स्टेशन पर घूमते हुए इन लड़कियों को देखा तो शक हुआ। उन्हें चौकी लाकर पूछताछ की गई तो उनके बारे में पता चला। तुरंत इसकी सूचना एसपी जीआरपी को दी गई तो उन्होंने बाल संरक्षण अधिकारी को सूचना दी गई। उन्होंने टीम भेजी और बच्चियों को अपने संरक्षण में ले लिया। दोनों के परिजनों को सूचना दी गई और उनके आने पर दोनों छात्राओं को उन्हें सौंप दिया गया।
छात्राओं से यह कहा
बाल कल्याण समिति के सदस्य अनिल झा और अफरोज खान ने बताया कि दोनों लड़कियों से जब काउंसलर्स ने बात की तो दोनों ने चौकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वो दोनों अपने परिवार के साथ रहती हैं और साइकिल से स्कूल जाती हैं। दोनों के साथ पढ़ने वाली और हास्टल में रहने वाली लड़कियां इस खेल को खेलती हैं। उनके साथ ही उन्होंने यह खेल सिखाया था। धीरे धीरे मजा आने लगा। दोनों ने बताया कि लैपटॉप और मैप के जरिए वे बार-बार अपनी लोकेशन व टास्क का समय अपडेट कर रही थी।
उन्होंने बताया कि दूसरा टास्क पूरा करते ही उन्होंने होशंगाबाद स्टेशन के वेटिंग रूम से अपने अन्य दोस्तों को एक सेल्फी भी भेजी थी। मैप देखने के बाद वे अगले दिन वापस आगरा लौटने वाली थी, लेकिन रात हो जाने के कारण वह कुछ डर गईं थीं और वहीं होशंगाबाद स्टेशन पर ही रुक गई। वे स्टेशन पर घूम रहीं थीं कि जीआरपी वालों को शक हुआ और वे उन्हें पुलिस चौकी ले आये। यहां उनसे पूछताछ के बाद डीडीआर दर्ज कर उन्हें चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया, वे काफी डरी हुई थीं, तो उनकी घर पर बात करवाई गई।