आगरालीक्स….(Video) आगरा में पश्चिमीपुरी रोड को देखने पहुंची मेयर. सड़क निर्माण में चल रही लीपापोती को कराई बंद, बोलीं—मुख्यमंत्री से की जाएगी पूरे प्रकरण की शिकायत…
हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी चौराहे तक हुए कथित सड़क घोटाले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रविवार को पार्षदों की जांच कमेटी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में थर्ड पार्टी द्वारा जांच की संस्तुति के बाद महापौर सोमवार को पश्चिमपुरी रोड पहुंच गईं। वहां पर अब किए जा रहे लीपापोती के कार्य को देखकर वह नाराज हो गईं। उन्होंने तुंरत कार्य को बंद करवाने के निर्देश दिए और कहा कि बहुत हो गई अधिकारियों की मनमानी, अब वह पूरे प्रकरण को माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगी। महापौर ने कहा कि कोई कितना भी बड़ा षड़यंत्र रच ले, अब वह रुकने वाली नहीं हैं। वह भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाकर ही छोड़ेंगी। महापौर ने किए जा रहे लीपापोती के कार्य पर सवाल उठाए और कहा कि जब कागजों में नाले, सड़क, इंटरलॉकिंग सब हो चुके हैं तो अब यह कार्य क्यों और किस मद या टेंडर प्रक्रिया के द्वारा किया जा रहा है। यह सब अपने पुराने पापों को छिपाने के लिए लीपापोती की जा रही है।गौरतलब है कि हेमा पट्रोल पंप से पश्चिमपुरी चौराहे तक नगर निगम आगरा द्वारा वर्ष 2023-24 में सड़क निर्माण व सड़क के दोनों ओर इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने का कार्य किया था। इस कार्य में गड़बड़ी के मामले को मीडिया द्वारा प्रकाश में लाया गया था। इसके बाद सदन की बैठक में पार्षदों द्वारा इस प्रकरण को लेकर हंगामा किया था और पूरे मामले की जांच करने की मांग की थी। इसके बाद महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल से इस मामले की जांच करने के लिए कमेटी गठित करने और सात दिन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया था। जब सात दिन के अंदर जांच कमेटी का गठन नहीं हुआ तो पार्षदों की मांग पर और अधिकारियों द्वारा दिखाई जा रही उदासीनता को देखते हुए महापौर ने खुद ही कमेटी का गठन करके जांच करने के लिए निर्देशित किया था। उक्त कमेटी में पार्षद हेमन्त प्रजापति, बसपा पार्षद दल के नेता यशपाल सिंह, पार्षद प्रवीना राजावत, पार्षद रवि करौतिया, पार्षद वीरेन्द्र सिंह लोधी, अपर नगर आयुक्त, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी, अरविन्द श्रीवास्तव, अधिशासी अभियन्ता को जाँच कमेटी में नामित किया गया था। कमेटी के पार्षद सदस्यों ने रविवार को महापौर को अपनी जांच आख्या सौंप दी, जिसमें नगर निगम द्वारा कमेटी के लिए कोई पत्राचार न करने, अधिकारियों द्वारा सहयोग न करने, मूल पत्रावली उपलब्ध न कराने और स्थलीय निरीक्षण में गड़बड़ी पाए जाने पर थर्ड पार्टी से जांच कराने की संस्तुति की थी।