आगरालीक्स..सूरा सो पहचानिए, जो लड़े दीन के हेत. आगरा में गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर आयोजित हुए कीर्तन दरबार…प्रकाश पर्व और शहीदी दिवस मनाए एक साथ
साहिबे कमाल खालसा पंथ के संस्थापक और सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व के अवसर पर 27 दिसंबर शनिवार को गुरुद्वारा माई थान में विशेष कीर्तन समागम का आयोजन किया गया । सिख समाज की केंद्रीय संस्था श्री गुरु सिंह सभा माईथान की ओर से पौष सुदी सप्तमी के दिन आयोजित विशेष कीर्तन दरबार मैं चंडीगढ़ से आए रागी भाई गुरविंदर सिंह जी के साथ-साथ आगरा शहर के अनेक रागी जत्थों व धर्म प्रचारकों ने हाजरी भरते हुए गुरु जस का गायन किया और गुरुमत विचार रखें।
कीर्तन समागम की आरंभता श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के साथ हुई जिसके बाद आज अखंड कीर्तनी जत्थे के भाई जसपाल सिंह जी और उनके जत्थे की ओर से आसा दी वार का कीर्तन किया गया। साथ ही गुरुद्वारा माईथान के हजूरी रागी बिजेंद्र पाल सिंह ,रागी भाई हरजिंदर सिंह बीबी कश्लीन कौर ने रसमई कीर्तन की हाजिरी भरी । इस अवसर पर मुख्य रूप से आगरा में पहली बार आए चंडीगढ़ से रागी भाई गुरविंदर सिंह जी ने गुरबाणी की अमृत वर्षा करते हुए पूरे माहौल को भक्ति से सराबोर कर दिया।

श्री गुरु सिंह सभा माईथान लके प्रधान कवलदीप सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी एक शहीद पिता के पुत्र और चार शहीद पुत्रों के पिता थे । मात्र नौ वर्ष की आयु में उन्हीं के आग्रह पर ही गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने सनातन व हिंदुत्व की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया तो वहीं मुगलिया अत्याचार के विरुद्ध हिंदुत्व की रक्षा की खातिर अपने चार पुत्रों ने इस्लाम कबूल ना करते हुए शहादत को पूरे उत्साह के साथ स्वीकार किय। कीर्तन समागम के अंत में आनंद साहिब का पाठ हुआ जिसके बाद ग्रंथि हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह जी ने सरवत के भले की अरदास की और हुकूमनामें के साथ कीर्तन दरबार की समाप्ति हुई ।जिसके बाद गुरु का अटूट लंगर वारताया गया।
मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि 27 नवंबर को जहां गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व था तो वही उनके दो छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह का शहीदी दिवस भी था ।सिख धर्म में जहां प्रकाश पर्वों को बहुत ही श्रद्धा भावना के साथ मनाया जाता है तो वहीं शहीदी दिवसों को शोक के तौर पर नहीं बल्कि शौर्य ,गर्व , उत्साह और जोश के साथ कीर्तन दरबार सजाये जाते हैं।
कीर्तन समागम के दौरान गुरुद्वारा गुरु का लाल के जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौरिया ,ग्रंथि हरबंस सिंह,वीर सिंह, परमजीत सिंह सरना,सतविंदर सिंह, प्रवीण अरोड़ा, पाली सेठी,, गुरमीत सिंह सेठी, त्रिलोक सिंह,हरपाल सिंह, विजय सामा,वीरेंद्र सिंह वीरे, राणा रणजीत सिंह,रौनक वाधवा, रक्षपाल सिंह ,बादल सिंह आदि मौजूद रहे।
गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर शाम का कीर्तन दरबार केंद्रीय तौर पर गुरुद्वारा कालगीधर सदर बाजार में आयोजित किया गया। कीर्तन समागम की शुरुआत ग्रंथी ज्ञानी अमरीक सिंह ने रहरास साहिब जी के पाठ के साथ की ।जिसके बाद बीवी बलजिंदर कौर ने कीर्तन की हाजिरी भरी।समागम में मुख्य रूप से रागी भाई गुरविंदर सिंह जी चंडीगढ़ वालों ने कीर्तन करते हुए संगत को गुरु चरणों से जोड़ा। समूह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रयास था कि कीर्तन समागम के माध्यम से संगत को गुरु गोविंद सिंह जी की बनी संघर्ष और शहादत से रूबरू कराया जा सके जिससे की नई पीढ़ी भी अपने गुरुओं के आदर्श को अपने जीवन में अपना सकें।कीर्तन समागम की समाप्ति आनंद साहिब के पाठ के साथ हुई । जिसके बाद ग्रंथि अमरीक सिंह ने अरदास की और हुकूमनामें के साथ कीर्तन समागम की समाप्ति हुई। इसके बाद मौजूद संगत ने एक साथ पंक्तिबद्ध हो गुरु घर का प्रसाद व लंगर ग्रहण किया।इस दौरान रमन साहनी सचिव रविंद्र सिंह ओबेरॉय बंटी ओबेरॉय ,बबलू अर्शी सिमरन सिंह सभरवाल, निर्मल सभरवाल दिलजीत सिंह दर्शन सिंह चोपड़ा आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।