आगरालीक्स…आगरा के एसएन में 1.4 किलो के बच्चे की हुई जटिल ‘गैस्ट्रोस्चिसिस’ सर्जरी. पेट से बाहर थी आंतें. एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने आपरेशन कर बचाई जान
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) के पीडियाट्रिक सर्जरी और बाल रोग विभाग के संयुक्त प्रयासों से एक अत्यंत जटिल मामले में सफलता प्राप्त हुई है। जन्म के समय मात्र 1.4 किलोग्राम वजन वाले एक नवजात शिशु, जिसकी आंतें पेट से बाहर (Gastroschiasis) थीं, को सफल ऑपरेशन और गहन चिकित्सा के बाद नया जीवन मिला है। शिशु को गंभीर स्थिति में एनआईसीयू (NICU) में भर्ती किया गया था। सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष व वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राजेश गुप्ता और उनकी टीम ने तुरंत सक्रिय होते हुए शिशु का प्राथमिक सुधार (Primary Repair) किया। ऑपरेशन के पांचवें दिन शिशु का पेट आंशिक रूप से खुल गया (Partial Burst Abdomen), जो कि एक जानलेवा स्थिति थी। हालांकि, प्रोफेसर राजेश्वर दयाल (बाल रोग विभाग) और उनकी एनआईसीयू टीम तथा डॉ. राजेश गुप्ता के रेजिडेंट डॉक्टरों के अथक परिश्रम से शिशु ने इस संकट को मात दी। आज 3 माह का होने पर बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान है।"यह मामला एस.एन. मेडिकल कॉलेज में दी जा रही उच्च स्तरीय नियोनेटल केयर (Neonatal Care) का प्रत्यक्ष प्रमाण है। 1.4 किलो के वजन वाले बच्चे में ऐसी जटिल जन्मजात विकृति और फिर पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं का सफल प्रबंधन करना हमारे डॉक्टरों की विशेषज्ञता को दर्शाता है। प्रोफेसर राजेश्वर दयाल, डॉ. राजेश गुप्ता और दोनों विभागों के रेजिडेंट डॉक्टरों का यह आपसी समन्वय (Teamwork) वास्तव में सराहनीय है। हमारा संस्थान गरीब और जरूरतमंद मरीजों को जीवन रक्षक सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है ।"
डॉ. प्रशांत गुप्ता (प्रधानाचार्य, एस.एन. मेडिकल कॉलेज)
"गैस्ट्रोस्चिसिस के मामलों में जीवित रहने की दर चुनौती पूर्ण होती है, विशेषकर जब बच्चा अंडरवेट हो। सर्जरी के बाद एनआईसीयू टीम और हमारे रेजिडेंट्स ने दिन-रात एक कर दिया। प्रोफेसर राजेश्वर दयाल जी के मार्गदर्शन और टीम के अटूट सहयोग से ही हम इस बच्चे को डिस्चार्ज कर पाए। आज फॉलो-अप में बच्चे की सक्रियता देखकर पूरी टीम को आत्मसंतुष्टि मिली है।"
डॉ. राजेश गुप्ता (विभागाध्यक्ष, सर्जरी विभाग एवं पीडियाट्रिक सर्जन)