आगरालीक्स…Agra News: आगरा में राज्य कर विभाग (एसजीएसटी) की टीम ने मार्बल और ग्रेनाइट की बोगस फर्मों का रैकेट पकड़ा, तीन फर्मों पर दर्ज कराया मुकदमा, एक मोबाइल नंबर पर जीएसटी में 23 फर्मों का पंजीयन।
आगरा में जीएसटी की टीम ने ई वे बिल एप पर ट्रैकिंग एवं विभागीय बोवेब पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओ का विश्लेषण करते हुए 18 मार्च की रात में राजस्थान के नंबर के ट्रक को कोरई टोल प्लाजा पर रोक लिया। ट्रक में 11224 वर्ग फीट मार्बल और ग्रेनाइट की स्लैब थी, जिन्हें किशनगढ़ राजस्थान निवासी लव कुश की फर्म आरके एंटरप्राइजेज द्वारा राजस्थान से अपंजीकृत व्यक्ति आगरा के लिए किया जा रहा था। इससे पूर्व भी इसी ट्रक और समान पैन नंबर पर रजिस्टर्ड अन्य फर्म एके एंटरप्राइजेज द्वारा करापंचन किए जाने का एक मामला आठ मार्च को आगरा की सचल दल इकाई 10 द्वारा पकड़ा गया था, जिसमें विभागीय कार्यवाही करते हुए अर्थदंड रुपए 9.5 लाख जमा कराया गया था।
एक मोबाइल पर 23 फर्म का जीएसटी में पंजीकरण
जीएसटी आगरा के संयुक्त आयुक्त चंद्रकांत रल्हन का मीडिया से कहना है कि जांच में सामने आया कि लव कुश द्वारा इसी फरवरी महीने में राजस्थान में आरके एंटरप्राइजेज, आगरा में एके एंटरप्राइजेज और जेके ट्रेडर्स का पंजीयन कराया था। फर्म के पंजीयन में प्रयोग किए गए मोबाइल नंबर पर कुल 23 फर्मो- आठ राजस्थान में, चार उत्तर प्रदेश में, तीन कर्नाटक में, दो-दो दिल्ली, मध्य प्रदेश महाराष्ट्र में, तथा एक-एक असम व गुजरात में जीएसटी में पंजीयन लिया गया, जिसमें 22 फर्मों का पंजीयन कूट रचित प्रपत्रों ,अन्य व्यक्तियों के दस्तावेजों का प्रयोग करने के कारण एवं करापंचन में लिप्त होने के कारण निरस्त किया जा चुका है। जांच पर पाया गया कि उक्त विक्रेताओं द्वारा कोई वास्तविक व्यापार नहीं किया जा रहा है। कई छदम व्यक्तियों के नाम से फर्म बनाकर करापंचन के उद्देश्य से नोन बोनाफाइड डीलर के लिए माल के मूवमेंट मात्र के लिए प्रपत्र जारी किए जा रहे हैं। संबंधित फर्म का पंजीयन फरवरी माह में लिए जाने के उपरांत कई वाहनों के माध्यम से मार्बल/ ग्रेनाइट का मूवमेंट राजस्थान से विभिन्न प्रांतो में किया गया है, जिस पर व्यापारी द्वारा कोई रिटर्न एवं कर जमा नहीं किया गया है। सचल दल इकाई 5 द्वारा उक्त वाहन में लदे माल पर वाहन स्वामी से रुपए 8.62 लाख जमा कराने के साथ ही दो अप्रैल को लोहा मंडी आगरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है एवं फर्म के जीएसटी पंजीयन के निरस्तीकरण की कार्यवाही कराई जा रही है, जिससे कि उक्त वाहन, पैन नंबर, मोबाइल नंबर एवं व्यक्ति द्वारा किए जा रहे करापंचन पर लगाम लग सके।