आगरालीक्स…आगरा में विश्व पुस्तक दिवस पर दिग्गज कवि—कवयित्री और साहित्यकारों ने लिया भाग. पुस्तक विमोचन, साहित्य चर्चा एवं पुस्तक प्रदर्शनी का भी हुआ आयोजन
आज विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष्य में अग्रणी साहित्यिक संस्था ताज लिटरेचर क्लब द्वारा एक साहित्य महोत्सव का आयोजन आगरा पब्लिक स्कूल ऑडिटोरियम विजय नगर कॉलोनी आगरा पर सफलतापूर्वक किया गया. जिसमें आगरा समेत कई शहरों से दिग्गज कवि-कवयित्री एवं साहित्यकारों ने भाग लिया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हाथरस से पधारे आशु कवि अनिल बोहरे, अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा, संस्थापक राजकुमार शर्मा, भावना वरदान शर्मा एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित और माल्यार्पण करके किया गया. स्वामी लीला शाह सरस्वती विद्या मंदिर के नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई.संस्था अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस बनाया जाता है. किताबें पढ़ने को प्रोत्साहित करने के लिए इस दिन का आयोजन किया जाता है. इस उपलक्ष्य में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा भव्य साहित्य उत्सव का आयोजन किया है. कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन, साहित्य चर्चा एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है. डॉ अरविंद कपूर की अंग्रेजी में लिखी कविताओं के संकलन एजिस ऑफ़ क्रीसेंडो का भी विमोचन किया गया.
काव्य संध्या में आगरा के सुप्रसिद्ध कवियों और कवित्रियों के अलावा हाथरस अकोला दिल्ली फिरोजाबाद और मथुरा से अनेकों कवियों ने भाग लिया. 23 अप्रैल को रामधारी सिंह दिनकर की भी जयंती होती है कार्यक्रम में उनकी कविताओं का पाठ करके उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. काव्य संध्या के उपरांत साहित्य चर्चा पुस्तक प्रदर्शनी के अलावा और भी कई साहित्यिक गतिविधियां आयोजित की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में अकोला से कवयित्री अंशु छोकर, अमरीश नाथ, राजीव निस्पृह उपस्थित रहे. काव्य पाठ करने वाले कवियों में सुषमा सिंह, राजेंद्र मिलन ,अशोक अश्रु, डॉ शशी गुप्ता, ब्रज बिहारी लाल बिरजू, प्रभु दत्त उपाध्याय, अमिता त्रिपाठी, विजया तिवारी, कामेश मिश्रा सनसनी, चारुमित्रा, रश्मि जैन ,महक, शेशपाल सिंह, संजय गुप्त, अशोक गोयल, डॉ ऊषा गिल, अशोक अग्रवाल ने एवं अन्य कवियों ने वीर, श्रृंगार और ओज की कविताएं सुना कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया.अशू छोकर ने इन पंक्तियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हाड़ी रानी पन्नाधाय, पद्मिनी, सी कहानी चाहिए,
आज की बेटी में संस्कारों की रवानी चाहिए।
चूड़ी वाले हाथों से जमकर° तलवारें थाम लो….
हर बेटी में लक्ष्मीबाई सी जवानी चाहिए।।