आगरालीक्स….25 मई सोमवार को अधिकमास मे मनाया जाएगा पापों से मुक्ति का महापर्व “गंगा दशहरा”…सोमवार, शिव और गंगा का अद्भुत संयोग…जानिए शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का त्योहार बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। गंगा सप्तमी के बाद गंगा जी का महत्वपूर्ण गंगा दशहरा आता है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिकमास जुड़ रहा है. 25 मई 2026 को मनाया जाएगा. इस तिथि पर ही मां गंगा पृथ्वी पर आईं थी. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार जो गंगा दशहरा पर गंगा नदी में स्नान करता है उसके 10 तरह के गंभीर पाप (3 शारीरिक, 4 वाचिक, 3 मानसिक) नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं.ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस बार गंगा दशहरा सोमवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
गंगा दशहरा 2026 मुहूर्त -इस दिन हस्त नक्षत्र और रवि योग और व्यतिपात योग बन रहा है। इन योगो मे पूजा करना मंगलकारी रहेगा। इस दिन पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है, जो सुबह 4:40 बजे से 5:23 बजे तक रहेगा। इसके ब सूर्योदय सुबह 6:06 बजे होगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से 1:10 बजे तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन वज्र योग प्रात:काल से लेकर 26 मई को तड़के 03 बजकर 15 ए एम तक है. वहीं उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र भी प्रात:काल से लेकर 26 मई को 04:08 ए एम तक है. स्नान और पूजन के बाद आप दान कर सकते हैं. इस बाद का ध्यान रखें कि, दान सूर्यास्त के पहले ही कर लें. यदि गंगा नदी तक जाना संभव न हो, तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी पुण्य प्राप्त होता है. गंगा दशहरा पर गंगा स्नान के समय 'ओम नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गङ्गायै नमः' मंत्र का जाप कर सकते है
गंगा दशहरा पर क्या करें ?
गंगा दशहरा के दिन नदी, तालाब या किसी जल स्रोत को प्रदूषित नहीं करना चाहिए. इस दिन जल संरक्षण का संकल्प लेना भी बेहद शुभ माना जाता है. इसके अलावा गरीबों को शीतल जल, छाता, पंखा और फल आदि का दान करना पुण्यदायी माना गया है.
गंगा दशहरा का महत्व -
पौराणिक कथा के अनुसार, कपिल मुनि के श्राप की वजह से राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार नहीं हो रहा था. राजा सगर के वंश में राजा भगीरथ हुए, उन्होंने राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष दिलाने के लिए गंगा को धरती पर लाने का निश्चय किया क्योंकि गंगा के स्पर्श से ही उन सभी को पापों से मुक्ति मिल सकती थी और वे मोक्ष पा सकते थे. तब राजा भगीरथ अपने कठोर तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके गंगा को धरती पर लाए. ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं, उनके स्पर्श मात्र से राजा सगर के 60 पुत्रों के पाप मिट गए और उनको मोक्ष मिला. तब से गंगा स्नान पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम बन गया.
अधिक मास में ही मनाया जाएगा गंगा दशहरा -
अधिक मास 17 मई, रविवार के दिन से लगेगा लेकिन इसके बावजूद गंगा दशहरा का पर्व अधिक मास में ही ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाएगा। ऐसा शास्त्र सम्मत विधान के अनुसार कहा जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास होने की स्थिति में, उसी माह में यह पर्व मनाया जाता है, शुद्ध में नहीं। 'ज्येष्ठे मलमासे सति तत्रैव दशहरा कार्या, न तु शुद्धे । दशहरासु नोत्कर्षः चतुर्व्वपि युगादिषु'
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया की शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास में गंगा स्नान, दान, पूजा आदि करना शुद्ध ज्येष्ठ की अपेक्षा अधिक फलप्रदायक होता है। इस दिन सुबह 9 बजकर 7 मिनट के बाद चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेंगे और सूर्य वृषभ राशि में रहेंगे। ऐसे में इस बार गंगा दशहरा के पर्व का महत्व और अधिक रहने वाला है।