आगरालीक्स… आगरा से नोएडा ढाई से तीन घंटे में पहुचाने वाले खूनी यमुना एक्सप्रेस वे पर 4905 रोड एक्सीडेंट में 705 लोगों की अभी तक मौत हो चुकी है। एम्स के तीन डॉक्टरों की मौत के साथ ही कारोबारी के बेटे से लेकर साइकिल सवार भी हादसे का शिकार हो चुके हैं।
आगरा से नोएडा तक कम समय में हाई स्पीड से पहुंचाने के लिए 15 अगस्त 2012 में यमुना एक्सप्रेस वे का उदघाटन हुआ था। इसके बाद से ही हाईवे पर हादसे होने लगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2012 से 2018 तक 4,900 सड़क हादसे हुए हैं। सड़क हादसों में 8,205 लोग चपेट में आए और 7,500 लोग घायल हुए।
705 लोगों की मौत
शनिवार रात को नोएडा से आगरा बर्थ डे पार्टी मनाने इनोवा से एम्स के छह डॉक्टरों के साथ सात लोग आ रहे थे। रात तीन बजे इनोवा कार सीएच 01 एएस 2431 मथुरा के थाना सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 88 के पास आगे चल रहे टैंकर में घुस गई, भीषण हादसे से इनोवा का आगे का हिस्सा कैंटर में घुस गया। तेज आवाज और चीख पुकार सुनकर पुलिस और स्थानीय लोग पहुंचे। इसमें सवार एम्स के डॉक्टर हर्षद (35) निवासी महाराष्ट्र , चंडीगढ़ के डॉक्टर यशप्रीत (26) और हरियाणा की डॉक्टर हेमबाला (25) की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं, एमपी के डॉक्टर जितेंद्र बिहार के डॉक्टर महेश और डॉक्टर अभिनव व त्रिपुरा की डॉक्टर केफमिन हैं।
रात एक से तीन बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे
यमुना एक्सप्रेस वे पर सबसे ज्यादा हादसे रात एक से तीन बजे के बीच में हुए हैं, इस दौरान नींद का झोका आता है। इन हादसों का एक बडा कारण वाहनों की ओवर स्पीड, टायर फटना और तीसरा कारण गाडी चलाते समय नींद का झोका आना है।
एयर प्रेशर से फट रहे टायर
यमुना एक्सप्रेस वे सीमेंटेड रोड है, एयर प्रेशर बढने से टायर गर्म हो जाते हैं, इससे टायर फट जाते हैं। इसलिए टायर में नाइट्रोजन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है, साथ ही प्रेशर भी अधिक नहीं होना चाहिए। यमुना एक्सप्रेस वे पर कार के लिए स्पीड लिमिट 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए स्पीड लिमिट 60 किलोमीटर प्रति घंटा है।