आगरालीक्स… आगरा के एसएसपी के पास फोन आया, कहा कि मुख्यमंत्री आवास से ओएसडी बोल रहा हूं, इंस्पेक्टर को अच्छी जगह कर दीजिए, वे अपने परिचित हैं, जांच में फर्जी ओएसडी सामने आने के बाद रकाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
आगरा के एसएसपी पर फोन आया, फोन पीआरओ ने उठाया, फोन करने वाले ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास से ओएसडी बोल रहा हूं, पीआरओ दौड़ते हुए फोन लेकर एसएसपी अमित पाठक के पास पहुंचा। एसएसपी ने बात की। सामने वाले ने कहा कि इंस्पेक्टर वीरपाल परिचित हैं। अच्छी जगह कर दीजिए। इस पर एसएसपी ने कहा कि कहा कि सिफारिश पर तैनाती नहीं करते हैं। सामने वाले ने कहा कि देख लीजिए। कोतवाली कर दीजिए। एसएसपी के अनुसार वह इस संबंध में ऊपर शिकायत करना चाहते थे। पता लगाया कि आखिर किसने फोन किया था। चार्ज के लिए थाना तक बता रहा था। लखनऊ पता लगाया। इसके बाद जिस नंबर से फोन आया था। उसकी छानबीन कराई गई। ताकि ऊपर तक लिखित में शिकायत की जा सके। पता चला कि फोन लखनऊ से आया ही नहीं था। जांच के बाद एसएसपी के पीआरओ की तरफ से रकाबगंज थाने में मुकदमा लिखाया गया। एसएसपी अमित पाठक का मीडिया से कहना है कि जिसकी सिफारिश की गई थी। उससे भी पूछताछ की जाएगी। किससे फोन कराया था। वह अनभिज्ञता जताएगा तो पुलिस अपने स्तर से फोन करने वाले को तलाश लेगी। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीजीपी बनकर शैलेंद्र ने किया था फोन
वर्ष 2015 में पुलिस ने शैलेंद्र अग्रवाल को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। उस पर धोखाधड़ी का आरोप था। शैलेंद्र ने इटरनेट के जरिए डीजीपी के सीयूजी नंबर से एक दरोगा को फोन करके धमकाया था। दारोगा की पत्नी ने उस नंबर पर कॉल बैक कर दिया था। कॉल बैक करने पर फोन सीधे तत्कालीन डीजीपी अरविंद जैन के पास पहुंचा था। मामला संज्ञान में आने पर शैलेंद्र के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया था।