आगरालीक्स… आगरा के लाल ने पाकिस्तानियों को मुंहतोड जवाब दिया, गोली लगने के बाद भी बंदूक नहीं छोडी, सुबह तिरंगे में लिपटा शव पहुंचा, ग्रामीण समाधि स्थल और आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए भीड उमड पडी है।
पाकिस्तानी सीमा पर शहीद हुए सिकन्दरा के गांव लखनपुर निवासी बीएसएपफ के जवान देवेंद्र सिंह का बुधवार सुबह शव पहुंच गया। ग्रामीण गांव के पास हाईवे के किनारे जहाँ अंतिम संस्कार करना है वहाँ पर शहीद का समाधि स्थल बनाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही शहीद के परिजनों को आर्थिक मदद समेत अन्य मांग कर रहे हैं, मांगे पूरा करने के आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार करने की बात कह रहे हैं।
मंगलवार को शहीद हुए देवेंद्र
आगरा के सिकंदरा के लखनपुर गांव निवासी 28 वर्षीय देवेंद्र बघेल पुत्र नारायण सिंह सीमा सुरक्षा बल की 173 वीं बटालियन में थे। उनकी पॉस्टिंग जम्मे में कठुआ जिले के हीरानगर भारत पाकिस्तान सीमा पर तैनात थे। सीमा पार से आतंकियो की घुसपैठ के बाद सर्च आॅपरेशन चलाया गया। इसी बीच पाकिस्तान की तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। इसमें सीमा सुरक्षा बल के जवान देवेंद्र सिंह घायल हो गए, उनका इलाज कराया गया लेकिन जान नहीं बच सकी। दोपहर में जम्मू में शहीद देवेंद्र की शहादत पर श्रद्रधासुमन अर्पित किए गए।

दो बच्चे, तीन साल पहले हुई शादी
सिकंदरा के लखनपुर निवासी नारायण सिंह के बडे बेटे देवी लाल केंद्रीय अर्ध सैनिक बल में जवान हैं। वहीं, छोटे बेटे देवेंद्र सिंह का 2011 में सीमा सुरक्षा बल में चयन हुआ था, वे काफी समय से जम्मू में भारत पाकिस्तान सीमा पर तैनात थे। देवेंद्र बघेल की शादी तीन साल पहले खंदौली के नगला हेता निवासी पिंकी से हुई थी। देवेंद्र के दो साल का बेटा धीरज और नौ महीने की बेटी ऋतिका हैं। वह डेढ़ महीने पहले कुछ दिन की छुट्टी लेकर परिवार से मिलने आए थे। पांच दिन बाद वह घर लौटकर आने वाले थे।
20 मई को छुटटी पर आना था
देवेंद्र के दो साल के बेटे धीरज का 25 मई को जन्मदिन है, उन्हें बेटे का जन्मदिन मनाने के लिए छुटटी मिल गई थी, 19 मई को जम्मू से आगरा के लिए आना था। इसी बीच मंगलवार को सीमा सुरक्षा बल के मुख्यालय से फोन आया कि पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलीबारी में घायल देवेंद्र की मौत हो गई है।
जम्मू में पाक सीमा पर शहीद बीएसएफ जवान देवेंद्र बघेल का शव उनके गांव लखनपुर पहुंचा। सिकन्दरा के गांव लखनपुर के रहने वाले थे शहीद। परिजनों और गांव वाले अपनी मांगों को पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद ही शहीद का अंतिम संस्कार करने की बात कह रहे हैं। गांव के पास हाईवे के किनारे जहाँ अंतिम संस्कार करना है वहाँ पर शहीद का समाधि स्थल बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा शहीद के परिजनों को आर्थिक मदद समेत अन्य मांगे भी हैं। मौके पर पहुंचे प्रशासन के अधिकारी परिजनों से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश में जुटे।