आगरालीक्स… आगरा के बजाय जेवर में एयरपोर्ट बनाने के प्रस्ताव के बाद निजी क्षेत्र के निवेशकों के न आने पर शैल कंपनी बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई, सिविल सोसायटी आगरा ने इसकी शिकायत सेबी में करते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी का पंजीकरण स्थगित करने का अनुरोध किया है।
गुरुवार को होटल द केएस रॉयल में आयोजित प्रेसवार्ता में अध्यक्ष डा शिरोमणि सिंह, सचिव अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना, अखिल महेश्वरी ने बताया कि आगरा में प्रस्तावित एयरपोर्ट अब जेवर गौतम बुदृध् नगर में बनाया जा रहा है। इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से बनाया जाना था लेकिन किसी भी निजी क्षेत्र की कंपनी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब यह प्रोजेक्ट यूपी सरकार को बनाया है। इस प्रोजेक्ट के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड बनाने की प्रक्रिया चल रही है। आगरा सिविल सोसायटी ने सेबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड एक मुखौटा (शेल कंपनी ) है। एयरपोर्ट निर्माण के लिए कंपनी पर आधारभूत ढांचा नहीं है। कंपनी के मुख्य निवेशक नोएडा डेवलेप्मेंट अर्थारिटी, ,ग्रेटर नोएडा डेवलेप्मेंट अर्थारिटी,यमुना एक्सप्रेस वे अथार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार को मिलकर 1441.1468 हेक्टेयर जमीन को अधिग्रहित करने के लिये 4065 करोड रुपये की राशि का निवेश करना है। इस राशि का भी एक बडा भाग उन तमाम न्रिष्क्रिय कंपनियों को जायेगा जिन्होंने किसानों से अपने नाम बैनामे करवा रखे हैं।
कंपनी की साक्षेदार या निवेशक कंपनियों में से नोएडा डेवलेप्मेंट अर्थारिटी और यू पी सरकार को 1500 करोड ,जबकि ग्रेटर नोएडा डेवलेप्मेंट अर्थारिटी और यमुना एक्सप्रेस वे अथार्टी को 500-500 करोड का निवेश करना होगा। इन निवेशों के आधार पर उ प्र सरकार व नौयडा डव्लपमेंट अथार्टी 37.5 प्रतिशत के तथा यमुना एक्सप्रेस वे अथार्टी तथा ग्रेटर नौयडा डव्पलमेट अथार्टी 12-12 प्रतिशत के भागीदार होंगे।ये तीनों ही मुनाफे में चलने वाली कंपनियां नहीं हैं।
सिविल सोसायटी आगरा भारत सरकार से आग्रह करती है कि अपने शेल कंपनियों के विरुद्ध शुरू किये गये अभियान को सार्थकता प्रदान करने के लिये एक और नयी कंपनी को कारोबार मे आने से पहले जांचें ।
सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा ने –

· सेबी, चीफ़ सेक्रेटरी उत्तर प्रदेश सरकार, सचिव मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स भारत सरकार, रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज उत्तर प्रदेश रीजन कानपूर, कैग दिल्ली और सीबीआई को पत्र लिख कर अवगत कराया है. और सम्बंधित विभागों से रिक्वेस्ट कि है के नए कंपनी को रजिस्टर ना किया जाये.
· सीबीआई नॉएडा और ग्रेटर नॉएडा अथॉरिटी में अपनी तहकीकात कर रही है – यादव सिंह के बारे में सभी जानते हैं.
· इस कंपनी का होने वाला बिज़नस लीगल अप्प्रोवाल्स में अटका हुआ है – एनसीआर बोर्ड का अप्रूवल नहीं है. हमने अपने पत्र के साथ सभी को एनसीआर एक्ट कि कॉपी भी भेजी है.
· यह सब प्रदेश कि जनता के साथ ठगी है और जनता के पैसे का दुरूपयोग है. आज कि केंद्रीय और प्रदेश सरकार अपनी मनमानी कर के आने वाले समय का एक बड़ा घोटाला टायर कर रही हैं. सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा इस का विरोध करती है और यह बात आम जनता तक लाना चाहती है.
· हम आगरा के साथ हो रहे अन्य का भरपूर विरोध करते हैं. टायर ओप्पोर्तुनिटी को छोड़ कर सरकार जेवर में एक नए फतेहपुर सिकिरी का निर्माण कर रही है. इतिहास गवाह है के अकबर को भी आगरा वापस आना पड़ा था.
यह लड़ाई आगरा के एयरपोर्ट जो कि लीगल है और जेवर जहाँ पर इल लीगल को लीगल करने कि है. जेवर में एनसीआर बोर्ड कि परमिशन नहीं ली गयी है, ना हि चक बंदी कि गयी है, उपजाऊ जमीन को तह्नस किया जा रहा है.
आगरा में एयरपोर्ट के लिए 400 करोड का निवेश
खेरिया हवाई अड्डे पर धनौली की ओर सिविल एन्क्लेव बनाया जाएगा। इस पर 400 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। सितंबर में परियोजना का काम शुरू कर दिया जाएगा।
अभी खेरिया हवाई अड्डे पर 250 यात्रियों के आगमन और प्रस्थान की क्षमता है, लेकिन नए एन्क्लेव में यह क्षमता प्रति घंटे 500 यात्रियों की हो जाएगी।
आगरा एयरपोर्ट से संचालित आरसीएस योजना में एमओयू के मुताबिक राज्य सरकार को 20 फीसदी भुगतान करना था। जनवरी और फरवरी के महीने में जयपुर आगरा उड़ान पूरी तरह फुल रही। इस पर 46.69 लाख रुपये वीजीएफ क्लेम किया गया, जिसमें प्रदेश सरकार ने 20 फीसदी हिस्सा 9.33 लाख रुपये दिए हैं।
एयरपोर्ट अथारिटी द्वारा गठित रीजनल एयर कनेक्टिविटी फंड ट्रस्ट के जरिए एलाइंस एयर को यह भुगतान किया जाएगा। प्रदेश सरकार के विशेष सचिव सूर्यपाल गंगवार ने नागरिक उड्डयन निदेशक को वित्तीय स्वीकृति का पत्र भेज दिया है।