आगरालीक्स… आगरा में निसंतान दंपती के आईवीएफ के फेल होने से परेशान हैं तो उनके लिए अच्छी खबर है, एम्ब्रियो स्क्रीनिंग से आईवीएफ के सक्सेज रेट को बढा सकते हैं। आगरा के एकमात्र एम्ब्रोलॉजिस्ट रेनबो आईवीएफ सेंटर के डॉ केशव मल्होत्रा ने बताया कि एम्ब्रियो स्क्रीनिंग कैसे की जाती है और इससे आईवीएफ के सक्सेज होने की उम्मीद बढ रही है।
देश में आईवीएफ का औसत सक्सेज रेट 40 पफीसद है, यानी 100 महिलाओं में से 40 महिलाओं में ही आईवीएफ सफल हो रहा है और वे मां बन पा रही हैं, 60 महिलाओं में आईवीएफ सपफल नहीं हो रहा है। इसके कई कारण हो सकते हैं, एम्ब्रो के प्रत्यारोपण के बाद गर्भपात होना एक आम समस्या है।
एम्ब्रो स्क्रीनिंग है जरूरी
रेनबो आईवीएफ के निदेशक एम्ब्रोलॉजिस्ट डॉ केशव मल्होत्रा
रेनबो आईवीएफ के निदेशक एम्ब्रोलॉजिस्ट डॉ केशव मल्होत्रा ने बताया कि टेस्ट टयूब बेबी के लिए एग और स्पर्म को फर्टिलाइज कराया जाता है, इसके बाद सेल डिवाइड होती हैं, ये दो से चार, चार से आठ और आठ से 16 इस तरह एम्ब्रो का विकास शुरू होता है।

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एम्ब्रो स्क्रीनिंग हाईटेक मशीन से की जाती है, इसमें एक साफटवेयर होता है। इससे पता चल जाता है कि कौन से एम्ब्रियो (भ्रूण) अच्छे हैं जिन्हें महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जा सकता है, कौन से एम्ब्रियो को फ्रीज कर रख सकते हैं और ऐसे एम्ब्रियो कौन से हैं जो खराब हैं और उनका इस्तेमाल नहीं करना है। इस तरह अच्छे एम्ब्रियो को प्रत्यारोपित किया जाए तो आईवीएफ का सक्सेज रेट बढ जाता है।