आगरालीक्स …यह नजीर है, आगरा में बिजनेसमैन सास ससुर ने अपने बेटे की बहू को हिम्मत दी, बहू पहली बार में सिविल सर्विसेज में सफल हो गई, डॉ आनंद की 62, डॉक्टर कपल के बेटे अभिनव और पूर्वी सिविल सर्विसेज में सफल हुए हैं।
शुक्रवार को यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज 2018 का परिणाम घोषित किया गया। इसमें आगरा ने भी बाजारी मारी है, डॉ आनंद कुमार शर्मा की 62 वीं रैंक आई है। डॉ कपल के बेटे अभिनव त्यागी की 150 वीं, अदिति की 282 और पूर्वी गर्ग की 317 वीं रैंक है।
गांव से निकली स़फलता, आनंद की 62 वीं रैंक
शमसाबाद निवासी डॉ. आरके शर्मा, डिप्टी चीफ वेटेनरी ऑफिसर, एटा और डॉ. मधु शर्मा के बेटे डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने एमबीबीएस के बाद सिविल सर्विसेज को लक्ष्य बनाया। पहली बार में 2016 में उनका आइआरएस में चयन हो गया। मगर, लक्ष्य आइएएस था। उन्होंने एक साल के लिए छुट्टी ली और तैयारी में जुट गए। उनकी 62 वीं रैंक आई है, वे नागपुर में आरआरएस का प्रशिक्षण ले रहे हैं,

डॉक्टर दंपती के बेटे अभिनव की 150 वीं रैंक
देवरी रोड निवासी डॉ. राकेश कुमार त्यागी और डॉ. सविता त्यागी के बेटे अभिनव त्यागी पोस्टल सर्विसेज में कार्यरत हैं। बीटेक करने के बाद प्राइवेट जॉब किया, इसके बाद सिविल सर्विसेज को लक्ष्य बना लिया। उनका तीसरी बार में सिविल सर्विसेज में चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि वे समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं इसलिए सिविल सर्विसेज को लक्ष्य बनाया। उनके छोटे भाई अभिषेक त्यागी आइआइटी कानपुर से बीटेक करने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं।

शादी के बाद तैयारी, पहली बार में मारी बाजी

मुगल रोड निवासी बिजनेस मैन राजीव अग्रवाल और मंजू अग्रवाल के बेटे बिजनेस मैन निशांत अग्रवाल की 2015 में सहपाठी अदिति से शादी की। एक साल आगरा में रहकर आर्किटेक्ट का जॉब किया लेकिन वे आइएएस बनना चाहती थीं। सास ससुर ने आशीर्वाद दिया और पति के साथ से राह आसान हो गई। दो साल से दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहीं हैं, उनका पहली बार में सिविल सर्विसेज में चयन हुआ है। उनकी 282 वीं रैंक है, वे गाजियाबाद में हैं, निशांत अग्रवाल रात में उन्हें लेने के लिए गाजियाबाद रवाना हो गए।
सीए पूर्वी की 317 वीं रैंक, बनना है आईएएस

जी ब्लॉक कमला नगर निवासी बिजनेस मैन संदीप गर्ग और सलोनी गर्ग की बेटी पूर्वी गर्ग ने हाईस्कूल करने के बाद सिविल सर्विसेज को लक्ष्य बनाया। वे सीए करने के बाद दिल्ली तैयारी करने चली गईं। उन्होंने बताया कि एक आम आदमी को सिस्टम की खामियों से परेशान होना पड़ता है। वे खुद भी विवि में डिग्री के लिए चक्कर लगाती रहीं, इसलिए सिविल सर्विसेज को लक्ष्य बनाया।