आगरालीक्स… आगरा में स्कूल में बाल यौन शोषण पर चर्चा की गई,बच्चों के प्रति होने वाला 92 प्रतिशत यौन अपराध व शोषण घर में ही होता है और उससे भी बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 57 प्रतिशत लडकों से जुडे हुए मामले हैं। ऐसे में बुधवार को प्रिल्युड पब्लिक स्कूल में शिक्षक वर्ग एवं सहायक कर्मियों को परिचित कराने के लिए ही आज पोक्सो अधिनियम की कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ता एडवोकेट नम्रता मिश्रा आगरा शहर की एक जानी-मानी विधि विशेषज्ञ के साथ-साथ बाल एवं महिला विकास विभाग से संबद्ध हैं। कार्यशाला का संचालन करते हुए बबिता रानी ने सभी का कार्यशाला में हार्दिक स्वागत किया। सर्वप्रथम विद्यालय की प्राचार्या याचना चावला ने पर्यावरण के प्रति सजगता का प्रतीक नवांकुर भेंट कर नम्रताका अभिनंदन किया।

अपनी कार्यशाला में नम्रता ने समाज में बढ रही बाल यौन शोषण एवं अपराध की घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज जिस विषय पर हम चर्चा कर रहे हैं, केवल आज ही नहीं, पहले के समय में भी यह सब होता रहा है। केवल आज लोगों में इसके प्रति जागृति बढ़ी है और हम इस विषय में खुलकर बात कर पाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर हुए सर्वेक्षण में पाया गया है कि बच्चों के प्रति होने वाला 92 प्रतिशत यौन अपराध व शोषण घर में ही होता है और उससे भी बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 57 प्रतिशत मामले लड़कों से जुड़े हैं और 52 प्रतिशत लड़कियों से संबंधित हैं। सारे संसार में भारत ऐसा देश है, जिसमें बाल यौन अपराध सबसे अधिक होते हैं।
निर्भया कांड के उपरान्त भारत में इस तरह के अपराध पर कानून बहुत सख्त हो गया है। 2018 में पोक्सो एक्ट में संशोधन करके 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे के साथ यौन अपराध पर फाँसी की सजा का प्रावधान किया गया है। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ यौन अपराध के लिए उम्रकैद की सजा दी जाती है और पोक्सो के अंतर्गत उम्रकैद की सजा का अर्थ आजीवन कैद है।

कार्यशाला के माध्यम से यह संवेदना जगाने का सफल प्रयास किया गया कि हम सब किस प्रकार सचेत रहकर अपने आस-पास रहने वाले बच्चों को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। कोई भी गलत कृत्य होने पर तुरंत पुलिस में सूचना दें। ऐसा अपराध छिपाना भी अपराध है। 1098 भारत सरकार द्वारा बाल संरक्षण के लिए उपलब्ध हेल्प लाइन नम्बर है। विद्यालय के निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता ने स्मृति चिह्न देकर नम्रता जी का अभिनंदन किया।