आगरालीक्स.. आगरा में फिल्म सिटी क्यों नहीं, वेब सीरीज के लिए आगरा बनेगा डेस्टिनेशन, दोपहर एक बजे, होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आगरा के संस्थापक सुरेंद्र शर्मा के साथ संपादक योगेंद्र दुबे होंगे लाइव, आप अपने सवाल और सुझाव फोन नंबर 0562- 4101404 .
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन आगरा, ब्रजमंडल हेरीटेज कंजर्वेशन सोसाइटी, अखिल भारीतय ब्राह्मण महासभा के संस्थापक सुरेंद्र शर्मा ने मेयर नवीन जैन द्वारा फिल्म सिटी की स्थापना आगरा में किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखने की सराहना करते हुए उनसे इसके लिए और प्रयास करने का अनुरोध किया है। वहीं आगरा के सांसद, विधायक और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोगो से फिल्म सिटी की स्थापना के लिए आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि आगरा की कुछ संस्थाओँ द्वारा मुंबई और दिल्ली में बसे फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों से संपर्क किया जा रहा ताकि वह आगरा में फिल्म सिटी की स्थापना के प्रयासों में सहयोग कर सकें।
आगरा में इसलिए बननी चाहिए फिल्म सिटी
आगरा में काफी लंबे समय से किसी बड़े उद्योग की स्थापना नहीं हुई है। आगरा सिर्फ ताजमहल और जूता उद्योग के सहारे ही घिसट रहा है। उद्योग-धंधे नहीं होने से प्रतिभाएं पलायन करने के लिए मजबूर हो रही हैं। आगरा के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, रंगकर्मी, होटल व्यवसायी समेत तमाम लोगों का कहना है कि आगरा के उद्योगों और पर्यटन क्षेत्र के आगे बढ़ाने के लिए फिल्म सिटी की स्थापना संजीवनी साबित होगी। प्रतिभाओं का पलायन तो रुकेगा ही साथ ही युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का असवर प्राप्त होगा।
पर्यटक रुके तो हर क्षेत्र को फायदा
देश-विदेश के पर्यटक भी फिल्म सिटी की स्थापना होने पर यहां ठहर सकेंगे। होटल व्यवसाइयों का कहना है कि आगरा में विश्वस्तरीय सुविधा के बड़े होटलों के साथ ही मध्यम वर्ग की सुविधा के तमाम होटल, गेस्ट हाउस हैं, लेकिन पर्यटन उद्योग में दिल्ली की लॉबी हावी है। वह बड़े शहरों से ही पर्यटकों के टूर इस तरह से फिक्स करती हैं कि पर्यटकों को आगरा में रुकना न पड़े और एक दिन में ही कुछ इमारतों का भ्रमण कराने के बाद दिल्ली वापस ले जाया जाता है, जबकि आगरा की ऐतिहासिक इमारतों, दर्शनीय स्थलों, मथुरा-वृंदावन, अलीगढ़, ग्वालियर आदि आसपास के मंदिरों के दर्शन आदि के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय चाहिये।
पर्यटकों के यहां आने पर उनके शूटिंग स्थलों को देखने, इसके बारे में जानकारी की भी इच्छा रहेगी तो पर्यटक यहां पर रुकेगा। इसका असर शहर के हर व्यवसाय पर पड़ेगा। वह मार्बल पत्थर की हस्तशिल्प से निर्मित वस्तुएं खरीद सकेगा तो पुराने शहर के जरदोजी के काम में चमक आएगी। जूता उद्योग को भी लाभ पहुंचेगा। शहर के पुराने और प्रमुख बाजारों की रौनक लौट आएगी।