आगरालीक्स.. आगरा में नवरात्र पर्व में शुक्रवार को माता के सप्तम स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाएगी। कालीवाडी मंदिर में माता रानी का यह स्वरूप वीरता, साहस और सशक्तीकरण का प्रतीक है। भानु चक्र जागृत होता है। आगरालीक्स में आज दुर्गा औषधि कवच, योग दर्शन, माता का भोग, लाभकारी उपाय।
सप्तम मां कालरात्रि की पूजा
महाशक्ति मां दुर्गा का सातवां स्वरूप है कालरात्रि। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। मां के इस रूप को साहस और वीरता का प्रतीक मानते हैं। माता रानी ने यह स्वरूप दुष्टों का संहार करने क लिए धारण किया था।
औषधि कवच
कालरात्रि यानी नागदौन- मातारानी महाकाली की आराधना के साथ नागदौन औषधि के प्रयोग से मन का भय दूर होता है और कई बीमारियों से निजात मिलती है, जो भक्त मन या मस्तिष्क के रोग से पीड़ित है, उसे मां कालरात्रि को नागदौन औषधि अर्पित कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। इस औषधि का इतना प्रभाव होता है कि यदि इसे घर में लगा दिया जाए तो घर के सभी सदस्यों को छोटी मौसमी बीमारियां हमेशा दूर रहेंगी।
योग दर्शन
मां कालरात्रि की आराधना के समय साधक को अपने मन को भानुचक्र, जो ललाट अर्थात सिर के मध्य स्थिर करना चाहिए। इस आराधना के फलस्वरूप भानु चक्र की शक्तियां जागृत होती हैं। मां कालरात्रि की भक्ति से भय का नाश होता है।
माता का भोग
सप्तमी तिथि को माता को गुड़ की वस्तुओँ का भोग लगाएं और इसका दान भी करें। इससे दरित्रता का नाश होता है। धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
लाभकारी उपाय
-नवरात्र में प्रातः श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ करने से हर कार्य सफल होते हैं। कार्यों में आने वाले विघ्न बाधाएँ शांत हो जाती हैं।
- नवरात्र में मां दुर्गा के साथ बजरंगबलि की पूजा विशेष फलदायी होती है। हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ करने से शनिदेव भी नहीं सताते हैं।